बेसहारे का सहारा – मंजू ओमर : Moral Stories in Hindi
साहब, साहब कल से हमार बेटवा घर नहीं आया है साहब ढूंढ लो उसे साहब,अरे आ जाएगा यही कहीं गया होगा दोस्तों के साथ। नहीं नहीं साहब वो तो इस समय तक रोज आ जाता है कहीं नहीं जाता है साहब मुझे बुढ़िया का अंधे की लकड़ी है वो साहब और मेरा कोई सहारा नहीं … Read more