मैं तेरी जीवन संगिनी – पूनम भटनागर : Moral Stories in Hindi

मेघा को जब यह खबर मिली तो वह घर का राशन लाने मार्केट गयी हुई थी। अभी वह दालें दूकान दार को लिखा ही रहीं थी कि पीछे से मालती बहन ने आकर कहा, मेघा जल्दी से घर जा , तेरे घर छापा पड़ा है। मेघा ने जितना सुना ,उस से ही वह बेहोश जैसे … Read more

कितने हसीन रिश्ते हैं यहाँ पर…..! – कंचन सिंह चौहान : Moral Stories in Hindi

प्रदीप से मिली थी मैं जुलाई २००२ में। वो शांता अम्मा का बेटा था। SSC परीक्षा द्वारा हिंदी अनुवादक पद पर चयन होने के पश्चात मुझे पहली पोस्टिंग मिली थी अनंतपुर, आंध्र प्रदेश में। सन् २००१ का अंत मेरे लिये ऐसे घटनाक्रमों का वर्ष था जो मेरी सपनो की तो सीमा में था लेकिन कल्पनाओं … Read more

राखी – शिखा जैन : Moral Stories in Hindi

शादी को दस साल हो गए थे उसकी।इन दस साल में पहली बार रक्षाबंधन पर अपने मायके आ रही थी। शादी के पाँच महीने बाद ही अमेरिका में जॉब लग गई थी पति की और फिर दोनों वही शिफ्ट हो गए। समय बीतता गया लेकिन व्यस्तताओं के चलते तबसे दो ही बार घर आ पाई … Read more

मातृत्व – पूनम शर्मा : Moral Stories in Hindi

” कितनी प्यारी है  गुड़िया ?” “सिस्टर! ये गुड़िया नहीं  मेरा मेरा नाती है। ” माँ की आवाज़ कानों पड़ते ही विभा की तंद्रा टूटी। वह होश में आ गई थी, लेकिन उसकी पलकें उसका साथ नहीं दे रही थीं। वह चाह कर आँखें नहीं खोल पा रही थी। फिर धीरे- धीरे उसका अतीत पन्नों … Read more

वेस्टिंग मनी वाला सरप्राइज़ – निशा जैन : Moral Stories in Hindi

दिवाली के चार पांच दिनो पहले  ” दीदी इस बार कितने कितने पैसे मिलाएंगे पटाखे लाने के लिए पॉकेट मनी से?” ईशान ने बड़ी बहन सिया से पूछा “अरे उतने ही जितने हर बार मिलाते हैं 500तू और 500मैं” सिया बोली पास ही बैठी उनकी मम्मी दिशा सारी बातें सुनकर बोली ” नही इस बार … Read more

खुशियों के दीप – खुशी : Moral Stories in Hindi

किशन जी एक समाज के प्रतिष्ठित व्यक्ति थे।घर में पत्नी राधा और दो बच्चे नेहा और सौरभ थे।बच्चे पढ़ाई में अच्छे थे। कुल मिलाकर एक प्यारा सा परिवार था।भाई बहन दोनो में भी बड़ा प्यार था समय बीता दोनो बच्चे बड़े होगए और सौरभ बैंक में मैनेजर लग गया   उसी के बैंक में नीलम … Read more

मुन्नी बाई – संध्या त्रिपाठी : Moral Stories in Hindi

      इतना सा गोबर लिपने का कितना लेगी मुन्नी बाई…..?  200 पूरे ₹200 लूंगी ….. क्या ….200 …?    बाप रे ….बस इतना सा गोबर लिपने का 200 ….!     हां मालकिन दिवाली है ना ….साल में एक ही बार तो कमाने का मौका मिलता है ….अभी तो सभी लोग गोबर से जरूर लिपवायेगें… फिर बाद में तो … Read more

मुक्ति (भाग-6) एवं (अंतिम भाग ) – कंचन सिंह चौहान : Moral stories in hindi

” क्या मतलब ?” “मतलब तो तुम ही जानती हो शायद ! उन सब बातों का मतलब जो तुम्हारे लिये होती हैं। ऐसी बातें सब क्यों करते हैं तुम्हारे लिये ?” सारिका ने मुझे प्रश्नवाचक दृष्टि से देखते हुए कहा और मैं उस दृष्टि का सामना नही कर पाई। मैं दूसरे कमरे में जा के … Read more

मुक्ति (भाग-5) – कंचन सिंह चौहान : Moral stories in hindi

मैं आगे बढ़ कर पीछे के रास्ते निकली और पड़ोस का पिछला दरवाजा खटखटाने लगी गाँवों के लिये तो उस समय आधी रात का समय था। एक अधेड़ उम्र की महिला ने दरवाजा खोला। मैने उन्हे देखते ही सारिका को उनके पैरों पर रख दिया। “चाची जिऊ ! एकर जिनगी बचाइ लें।” ” का भै … Read more

मुक्ति (भाग-4) – कंचन सिंह चौहान : Moral stories in hindi

ससुराल में आने के बाद कभी-कभी ओसारे में बाबू जी को खाना देने आती थी। वो भी तब जब ये नही होते थे। वो मेरी आखिरी सीमा रेखा थी। लेकिन आज मुझे अपनी कोई भी सीमा रेखा नही याद थी। मैं नंगे पैर ही उधर दौड़ पड़ी जहाँ से गाँव भर की आवाजें आ रही … Read more

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