माता-पिता के साथ बिताए पल ही असली त्यौहार हैं – रिद्धिमा पटेल : Moral Stories in Hindi

गांव के पुराने घर में रामदीन और उनकी पत्नी, शांता, अपनी ढलती उम्र के साथ वक्त बिता रहे थे। उनके बेटे मोहन की शादी को अब दो साल हो गए थे, और वह शहर में अपनी पत्नी के साथ रहता था। गांव में किसानी और छोटे-मोटे कामों से जैसे-तैसे गुजर-बसर चल रही थी, लेकिन बढ़ती … Read more

सच्चा रिश्ता – पुष्पा जोशी : Moral Stories in Hindi

गांव में बने पुराने घर के बड़े बरामदे में बंसीलाल जी इस बार अकेले बैठे थे। कुछ साल पहले तक इस घर में उनकी पत्नी और दोनों बेटे थे, और पूरे घर में रौनक रहती थी। लेकिन वक्त ने जैसे परछाई बदल दी थी। उनकी पत्नी का निधन हुए कई साल हो गए, और दोनों … Read more

और कितनी परीक्षा दूंगी.. – संगीता त्रिपाठी  : Moral Stories in Hindi

“ये क्या रूचि, दूध गैस पर रख, तुम यहाँ मोबाइल पर गप्पे मार रही हो, सारा दूध जल गया,”कनक ने कहा तो रूचि का मुँह फूल गया…, ये सास और ससुराल दोनों ही आफत है, एक मिनट भी चैन नहीं…,भुनभूनाते हुये रसोई की ओर चल दी। रूचि को भुनभूनाते देख कनक जी सोच में डूब … Read more

निठल्ला दामाद नहीं चलेगा तो निठल्ली बहू कैसे चलेगी?? – सविता गोयल : Moral Stories in Hindi

” रूचि….कहां चल दी सुबह सुबह…. ?? तुम्हें पता है ना आज दीदी और जीजा जी आने वाले हैं !!” रमन ने अपनी पत्नी को बैग में कपड़े डालते हुए देखा तो पूछ बैठा। ” हां…. मुझे पता है तुम्हारे बहन बहनोई आ रहे हैं…. लेकिन मैं कोई इस घर की नौकरानी नहीं हूं जो … Read more

हाफ़ टिकट – विभा गुप्ता  : Moral Stories in Hindi

     नौ साल की छोटी उम्र में हाॅस्टल चली गई।तब ट्रेन-बस में कैसे सफ़र करते हैं..टिकट कहाँ से लेते हैं..क्या नियम है..ये सब कुछ नहीं जानती थी।छुट्टियाँ होते ही घर से पिताजी या चाचा आ जाते थें और मैं उनके साथ चली जाती थी।कभी-कभी अपने कैंपस के टिकट काउंटर पर लड़कियों की लंबी लाईन देखकर ज़रूर … Read more

सोच – ऋचा उपाध्याय : Moral Stories in Hindi

 नमस्कार मुकुंद भैया!! अपनी रीना बिटिया के लिए कोई अच्छा रिश्ता बताइएगा ।आपकी रिश्तेदारी में तो सुना है बहुत अच्छे-अच्छे लड़के हैं।मंजू दी ने कहा।     मैंने भी मुस्कुराते हुए कहा ज़रूर मंजू दी ,बस आपको कैसा लड़का चाहिए ये बता दीजिए मैं ध्यान में रखूंगा।   अरे भाई साहब हम मध्यमवर्गीय परिवार वाले ज्यादा नहीं सोचते। … Read more

बदजात – कंचन सिंह चौहान : Moral Stories in Hindi

दुबली पतली सी वह, बड़ी सी आँखों वाले साँवले चेहरे और थोड़े से भरे होंठ के साथ, हाथ में चाय की ट्रे लिये सिमटी सकुचाई खड़ी थी। शायद हाथ काँप रहे थे उसके। बिस्नू इधर-उधर हिल डुल कर थोड़ा संभल कर बैठने लगे थे। भईया जी ने उनके हाथ पर हाथ रखते हुए उन्हें सामान्य … Read more

अस्तित्व – पूनम शर्मा : Moral Stories in Hindi

विशाखा आज पहली बार रिटायरमेंट के बाद अपने घर में अकेली थी क्योंकि परिवार के सभी सदस्य अपने अपने काम पर घर से निकल चुके थे ।आज वह अनमनी सी किंकर्तव्यविमूढ़ बैठी हुई थी। सोचा, क्यों न प्याली चाय बनाकर आगे के बारे में सोचा जाए। वह चाय बना लाई और ड्राइंग रूम के सोफे … Read more

खुशियों का दीप – दीपा माथुर : Moral Stories in Hindi

अवि खिड़की से बाहर टकटकी सी लगाई बैठी थी। तभी सौरभ ने आवाज लगाई ” अवि खाने का टाइम हो गया यार अब तो खाना परोस दो।” अवि वही से चिल्लाई ” बस दो मिनिट “ सौरभ डाइनिंग टेबल पर बैठ गया अवि खाना परोस रही थी की उसे याद आया ” अरे तुमने याद … Read more

खुशियों की तलाश – अंजु गुप्ता ‘अक्षरा’  : Moral Stories in Hindi

सब कुछ है, पर न जाने क्यों हमारा ही घर खुशियां तलाशता रहता है, मन ही मन रमा सोच रही थी। फिर हिम्मत कर महेश से बोली, “सुनो जी! विभू नए लैपटॉप के लिए बोल रहा है।” “अभी दो साल पहले ही तो उसे लैपटॉप दिलवाया था, नए की क्या जरूरत है?” महेश जी मानो … Read more

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