मेरी अनपढ़ माँ का ओहदा – विभा गुप्ता
“जिस पत्नी को पति ने महफिल में ‘गंवार’ कहकर चुप करा दिया, उसी बेटे ने माइक थामकर पिता की सारी डिग्रियों को कागज का टुकड़ा साबित कर दिया। आखिर उस बेटे ने भरी सभा में ऐसा क्या कह दिया कि पिता की नजरें झुक गईं?” — “सोचना बंद करो तुम!” शेखर जी ने चिढ़कर उनकी … Read more