मेरी अनपढ़ माँ का ओहदा – विभा गुप्ता

“जिस पत्नी को पति ने महफिल में ‘गंवार’ कहकर चुप करा दिया, उसी बेटे ने माइक थामकर पिता की सारी डिग्रियों को कागज का टुकड़ा साबित कर दिया। आखिर उस बेटे ने भरी सभा में ऐसा क्या कह दिया कि पिता की नजरें झुक गईं?” — “सोचना बंद करो तुम!” शेखर जी ने चिढ़कर उनकी … Read more

झूठी शान के खंडर – संगीता अग्रवाल

“अक्सर हम जिसे अपना खून कहते हैं, वही हमारी रूह को छलनी कर देता है, और जिसे पराया समझते हैं, वो हमारे स्वाभिमान की ढाल बन जाता है। क्या एक बेटे के लिए ‘सच’ बड़ा है या ‘परिवार की झूठी इज़्ज़त’?” — “तमीज़ तो मैं तब भूल गया था भैया, जब मैंने अपनी आँखों से … Read more

पिंजरे की मैना – माधुरी शर्मा 

“क्या एक बेटी की डोली उठने के बाद, उसके घर लौटने का रास्ता हमेशा के लिए बंद हो जाता है? या फिर स्वाभिमान की लड़ाई में मायके की दहलीज़ लांघना कोई गुनाह नहीं?” “माँ-पापा, मुझे माफ़ कर दीजियेगा। मैं आपकी ‘अच्छी बेटी’ नहीं बन पाई जो चुपचाप जुल्म सह ले। लेकिन मैं एक ‘आत्मनिर्भर औरत’ … Read more

माटी की गुड़िया – अनिता गुप्ता

माँ ने अपने हाथों की लकीरें मिटाकर बेटे की तकदीर लिखी थी, लेकिन बेटे के ‘आधुनिक’ घर में उस माँ के लिए कोई कोना नहीं बचा। क्या एक बेटे की तरक्की उसकी माँ के आत्मसम्मान से बड़ी हो सकती है? सावित्री देवी की आँखों से आंसू बह निकले। मूर्ति टूटने का दुख नहीं था, बेटे … Read more

पहला प्यार – सुनीता मुखर्जी “श्रुति”

रितिका तुम तैयार हो जाओ…! आज कहीं बाहर चलते हैं। और हाँ….! रात का खाना भी बाहर खाकर आएंगे, ऑफिस से आते ही रमन बोला।  रितिका भी बाहर जाने के लिए कई दिनों से सोच रही थी, लेकिन अभी महीना खत्म होने में पाँच दिन बाकी थे। उसने रमन से इस संबंध में कुछ नहीं … Read more

अपराधबोध – सीमा सिंघी 

सुनंदाजी की नजर जैसे ही अपनी बहू मीरा की थाली पर पड़ी । वो थाली की ओर देखते हुए तुरंत कड़क आवाज में कहने लगी। देखो बहू मेरे लिए तुमने शाम के लिए  गट्टे की सब्जी रख दी है ना ?? क्योंकि गट्टे की सब्जी मुझे बहुत पसंद है। अपनी सासू मां की कड़क आवाज … Read more

इस गुनाह की माफी नहीं – दीपा माथुर

रीवा स्टेशन पर उतरी तो धुंध अभी टूटी नहीं थी। रात की ठंड जैसे लोहे की पटरियों में छिपकर उसके कपड़ों में उतर रही थी। उसके एक हाथ में छोटा-सा सूटकेस था, दूसरे हाथ में पाँच बरस का आरव— कभी कोट का सिरा पकड़ता, कभी उंगली कसकर थाम लेता, जैसे दुनिया एक अजगर है जो … Read more

प्यार के रंग पीढ़ियों के संग – संगीता त्रिपाठी

  “नानी क्या आपका भी कभी किसी से क्रश था “वन्या उत्सुकता से नानी को देख रही थी,     “ये क्रश क्या होता है लाड़ो..”आँखों में हैरानी लिये नानी ने नातिनी के प्रश्न पर पूछा.       “अरे नानी क्रश मतलब प्यार… क्या आपने किसी से प्यार किया था “         “हाँ… तुम्हारे नाना से..”          “नाना से तो आपकी शादी … Read more

पहला प्यार – अर्चना खण्डेलवाल

आज शिरीष को बाजार में देखा तो देखती ही रह गई, तभी मेरी नजर दुकान पर लगे आइने पर गई, अगले ही पल मैंने अपनी आंखें स्वयं ही फेर ली, अब मैं विवाहित हूं, गले में मंगलसूत्र और माथे पर सजा सिंदूर मुझे ग्लानि महसूस करवा रहे थे, इस तरह विवाह के पश्चात पति को … Read more

मेरा पहला प्यार – संजय सिंह

शाम 4:00 का समय था। राज घर के बाहर जाती धूप में कुर्सी लगाकर चुपचाप बैठा था ।पास में उसका  कुत्ता भी धूप का आनंद ले रहा था ।घर पर कोई नहीं था ।राज को बड़े लाड प्यार से पढ़ा लिखा कर ,काबिल इंसान बनाने में जिस हस्ती का न हाथ था। वह उसकी मां … Read more

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