अधूरी चाहत – शिव कुमारी शुक्ला : Moral Stories in Hindi
शाम के छः बजे थे, फरवरी का महीना था। हल्की-हल्की गुलाबी ठंडक वातावरण में मौजूद थी क्योंकि ठंडी हवा भी चल रही थी, किन्तु इतनी ठंडक सुहानेवाली थी। आलोक जी एवं सुनयना जी घर के सामने ही बने छोटे से बगीचे में बैठे चाय का आंनद ले रहे थे। दोनों बेटे कोचिंग गये हुए थे। … Read more