*सदाबहार* – मुकुन्द लाल : Moral Stories in Hindi
” उठो!.. जल्दी उठो!..” चारपाई पर सोई हुई जसोदा को उसके पति हरिहर ने उसे झिंझोड़ते हुए जगाया। ” क्या हुआ?.. पागल हो गये हो क्या? .. सुबह-सुबह..” “ठेला गायब हो गया है, तुमको नींद सूझ रही है..” “ऐं!.. ठेला नहीं है?.. कल शाम में तो घर के बाहर यहीं पर किनारे रखा हुआ था … Read more