सजा किसी भी रूप में हो सकती है – हेमलता गुप्ता : Moral Stories in Hindi

मम्मी पापा…. आप क्या करेंगे मेरे साथ चलकर मैं कोई पहली बार बाहर थोड़ी जा रहा हूं माना कि मेरी पहली नियुक्ति है और वह भी इतने बड़े शहर में  किंतु में इतने सालों से बाहर शहर में ही तो रह रहा हूं मेरी सारी पढ़ाई बाहर शहर में ही हुई है तो मैं सब … Read more

घर की इज्जत – मनीषा सिंह : Moral Stories in Hindi

यशोदा•••! जहां तक•• मैं समझता हूं– तो•• तिलक सही कह रहा है•• एक बार हमें उसके कथन पर विचार करना चाहिए••!  देखो जी•••” मैं तो बिल्कुल भी इस बात के लिए राजी नहीं हूं•• यदि गांव वालों को पता चला तो क्या इज्जत— इज्जत जाएगी नहीं•• बल्कि” घर की इज्जत”घर में ही रहेगी•••! बीच में … Read more

बहू के पल्लू नहीं रखने से घर की इज्जत नहीं चली जाती – अर्चना खंडेलवाल   : Moral Stories in Hindi

ये क्या बहू !! तू बिना सिर पर पल्लू रखें, घर के बाहर चली गई, बहू घर की इज्जत होती है, ये तेरा शहर नहीं है, जहां कुछ भी चलता है, ये गांव है और आस-पास सारे रिश्तेदार रहते हैं, पुराने पड़ौसी है, वो बिना पल्लू के देखेंगे तो क्या सोचेंगे कि सुमित्रा ने अपनी … Read more

डर – संगीता त्रिपाठी : Moral Stories in Hindi

मोबाइल की रिंगटोन सुनते ही विजय ने कॉल उठा लिया..    “क्या…, कैसे..”सुनते ही मैं भी विजय के पास आ गई।  “सुना तुमने श्याम जी के बेटे ने आत्महत्या करने की कोशिश की, अस्पताल से श्याम जी का फोन था .”फोन रखते विजय घबराये स्वर में बोले।     “अरे… ये कब हुआ, कैसे ..”मैं भी आवाक थी। … Read more

अंत भला तो सब भला – श्वेता अग्रवाल : Moral Stories in Hindi

दोपहर के डेढ़ बज रहे थे। नीलांजना अपनी बहू सुहाना के कॉलेज से लौटने का इंतजार कर रही थी। सुहाना शहर के डिग्री कॉलेज में प्रोफेसर थी,वो रोज दो बजे तक कॉलेज से घर लौट आती। फिर,दोनों साथ में लंच करती। सुहाना ने नीलांजना से कितनी बार कहा भी था की “माॅंजी आप मेरा इंतजार … Read more

दोहरे मापदंड – शिव कुमारी शुक्ला : Moral Stories in Hindi

ये क्या बात हुई मम्मी कि भैया कुछ भी करे आप उसे तो रोकतीं नहीं किन्तु मुझे आज सहेली के जन्मदिन की पार्टी में जरा देर क्या हो  गई इतना सुना रही हो । मैं तो ज्यादा कहीं आती जाती  भी नहीं हूं जबकि भैया न तो ढंग से पढ़ते हैं और देर रात गए … Read more

ड्रेसिंग टेबल – विभा गुप्ता : Moral Stories in Hindi

    हमारे समय में हर पिता अपनी बेटी को विवाह में पलंग, डाइनिंग टेबल, सोफ़ासेट, टीवी, फ़्रिज के साथ एक ड्रेसिंग टेबल देकर ही ससुराल विदा करते थें।मैंने अपनी तीन बड़ी बहनों की शादी देखी थी।बड़ी दीदी को एक शीशे वाला आदमकद ड्रेसिंग टेबल मिला।मंझली दीदी को डबल शीशे वाला(फ़ोल्डिंग) ड्रेसिंग टेबल और नमिता दी के … Read more

जख्म – खुशी : Moral Stories in Hindi

आरती और विष्णु दोनो अनाथ आश्रम में पल कर बड़े हुए कोई रिश्तेदार ना था न ही उन्हें कोई गोद लेने आया। बचपन से एक साथ पले बढ़े तो विष्णु को जब नौकरी लगी तो उसे वह आश्रम छोड़ कर जाना पड़ा।आरती बहुत रोई बोली मुझे भी ले चलो।विष्णु बोला ६ महीने दो मैं तुम्हे … Read more

एक हाथ से ताली नहीं बजती – सीमा गुप्ता : Moral Stories in Hindi

“तन्वी और पर्व दोनों ही बच्चों को गाजर का हलवा बहुत पसंद है। जब तक वे दोनों PTM से वापस आएंगे, तब तक हलवा बनकर तैयार हो जाएगा। दोनों बहुत खुश हो जाएंगे।” अपने पोता-पोती के लिए बड़े मनोयोग से हलवा बनाते हुए राधा जी सोच रही हैं। देख लिया न तुमने! तन्वी के 3 … Read more

घर की इज्जत – डाॅ संजु झा : Moral Stories in Hindi

एक दिन जिस बेटी निशा के कारण घर की इज्जत नीलाम हो चुकी थी,पूरे समाज में थू-थू हो रही थी, आज उसी बेटी को बेस्ट उद्यमी महिला का पुरस्कार लेते देखकर  उसके परिवार का का सीना गर्व से चौड़ा हो उठा। निशा आफिस से आकर कमरे में टेबल पर पड़ी हुई चिट्ठी देखकर पूछा बैठती … Read more

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