बहू का सुख पाने के लिए पहले सास को भी अपना रवैया ठीक करना पड़ेगा। – गीतू महाजन

इस बार जब पल्लवी मायके आई तो देखा कि नए पड़ोसियों से उसकी मां नंदिनी जी की अच्छी खासी दोस्ती हो गई थी।उन लोगों का घर में आना जाना भी था और जब पल्लवी आई तो पड़ोस की रीमा आंटी उससे बहुत ही आत्मीयता से मिली ऐसे जैसे उसके बारे में बहुत कुछ जानती हो।दो-तीन … Read more

पहला पहला प्यार – मंजू ओमर 

रश्मि क्या तुम मुझसे मिलने होटल में आओगी, रश्मि चुप थी।बोलो रश्मि तुम्हें मेरे प्यार की कसम। नहीं सलिल तुम मेरे घर आ जाओ मिलने मैं ऐसे कैसे अकेले आ सकती हे। नहीं यार रश्मि वहां तुम्हारे पति देव रहते हैं खुल कर तुमसे बात नहीं हो पाती है।अब कौन सी खुलकर बात करनी है … Read more

प्यार की अनकही वसीयत

 क्या बुढ़ापे में एक-एक पैसे के लिए मोहताज की तरह जीना सच में लालच की निशानी होती है, या उस फटे हुए स्वेटर और घिसी हुई चप्पलों के पीछे कोई ऐसा मौन और गहरा बलिदान छिपा होता है, जिसे दुनिया की सतही नज़रें कभी नहीं देख पातीं? रोहन पैर पटकता हुआ पंडित जी के घर … Read more

“अहंकार की सिलवटें”

 क्या एक सास का खोखला अभिमान उसकी अपनी ही बेटी की इज्जत को दांव पर लगा सकता है? और क्या एक बहू, जिसे हमेशा ताने मिले हों, उसी घर की लाज बचाने के लिए अपनी ढाल आगे कर सकती है? नेहा अपनी सास, सुभद्रा देवी की बातें सुनकर चुप रही। वह जानती थी कि कुछ … Read more

रेशमी रिश्ते

क्या दौलत की चमक अपनों के उस निस्वार्थ प्यार को फीका कर सकती है, जो किसी शोरूम के टैग में नहीं, बल्कि रातों की नींद और भावनाओं में बुना होता है? पढ़िए कैसे एक महंगी जीवनशैली के नशे में चूर ननद ने अपनी ही भाभी के प्यार को ठुकराया, और कैसे एक समझदार सास ने … Read more

*सबसे गहरा ज़ख्म अपने ही देते है* – तोषिका

आज नियति ने ये साबित कर दिया *सबसे गहरा जख्म अपने ही देते है*। यहाँ इस दुनिया में कोई किसी का अपना नहीं है, रोते हुए पार्क में बैठा रॉबिन बोला, तभी पास से एक आवाज़ ने पूछा “क्या हुआ दोस्त तू रो क्यों रहा है?” रॉबिन बोला “अब क्या बताऊ मैं तुम्हे, जब उनको … Read more

“समझदारी का मोती” – संगीता अग्रवाल

क्या बेटियों की शादी में लाखों रुपये सिर्फ चार घंटे के दिखावे और झूठी शान पर फूंक देना समझदारी है? एक सास जो हमेशा अपनी बहू को ‘कम अक्ल’ मानती थी, उसे कैसे एक तूफानी रात में समझ आया कि उसकी बहू ने अपनी उसी ‘बेवकूफी’ से उसकी बेटी का पूरा भविष्य संवार दिया है? … Read more

“रिश्तों की छांव” – रश्मि प्रकाश

जब आज़ादी की चाहत में एक नई बहू ने भरे-पूरे परिवार को ‘नौकरानी’ बनने का ताना देकर छोड़ दिया, तो क्या अकेलेपन की उन चार दीवारों ने उसे वो सुकून दिया जिसकी उसे तलाश थी? पढ़िए, कैसे एक जेठानी के मौन और समर्पण ने देवरानी को जिंदगी का सबसे बड़ा सबक सिखाया। स्वाति की आँखें … Read more

 “फर्ज़ की चौखट” – मुकेश पटेल

समाज कहता है कि शादी के बाद बेटी ‘पराया धन’ हो जाती है, लेकिन जब उस ‘पराये धन’ के अपने ही माता-पिता बेसहारा हो जाएं, तो क्या एक बेटी को रिवाजों के नाम पर अपना फर्ज़ भूल जाना चाहिए? पढ़िए एक इकलौती बेटी की कहानी, जिसने समाज की दोहरी मानसिकता को आईना दिखाते हुए अपने … Read more

रेशम के धागे

क्या एक सास का अपनी पुरानी यादों और पसंद से मोह, एक नई बहू के प्यार और अनकही कोशिशों पर भारी पड़ सकता है? एक मामूली सी दिखने वाली साड़ी कैसे दो पीढ़ियों के बीच की उस अदृश्य दीवार को गिरा सकती है जिसे सालों की रवायतों ने खड़ा किया हो, पढ़िए इस मार्मिक कहानी … Read more

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