सम्मान की चमक – भगवती : Moral Stories in Hindi

सुष्मिता आज बहुत खुश थी। आज रिशी के साथ उसकी सगाई होने वाली थी। रिशी एक संपन्न परिवार का सुदर्शन युवक था। उसके भावी ससुराल में सास ससुर के अलावा रिशी की एक छोटी बहन रेखा थी। सगाई संपन्न हो चुकी थी। तीन माह बाद विवाह की तारीख तय हुई थी। इन तीन महीनों में … Read more

बड़ी बहू – विनय मोहन शर्मा : Moral Stories in Hindi

   आज सुमित्रा के देवर राहुल का तिलक समारोह है। हमारी कहानी की पात्र बड़ी बहू यानि सुमित्रा को पल भर के लिए भी फुरसत नहीं थी। तिलक समारोह का कार्यक्रम  निखिल माथुर जी ने अपने ही घर पर रखा था। अरे बहू! कहां हो, देखो अभी तक नाश्ता भी तैयार नहीं है। लड़की और उसके … Read more

सिर्फ सोच का फर्क – लतिका पल्लवी : Moral Stories in Hindi

 सुबह -सुबह  कॉलबेल की आवाज सुनकर सरला जी भूनभूनाते हुए दरवाजा खोलने के लिए उठी। पता नहीं कौन सुबह – सुबह  आ धमका मेरी नींद खराब करने के लिए  दरवाज़े पर बहु के माता – पिता  को देख कर उनका दिमाग़ जो सुबह जगने के कारण पहले से ही खराब हो रहा था और ज्यादा … Read more

पैरों की धूल समझना – हेमलता श्रीवास्तव : Moral Stories in Hindi

राहुल पिछले काफी टाइम से उदास और परेशान रहने लगा था मां ने एक दिन पूछा भी की क्या बात है बेटा तबीयत नहीं ठीक है? ऑफिस में कोई परेशानी है? नहीं मां ऐसी कोई बात नहीं है,  राहुल हर बार मना कर देता था कि नहीं कोई परेशानी नहीं है वह कैसे किसी को … Read more

फैसला – खुशी : Moral Stories in Hindi

दीनानाथ जी एक फैक्ट्री में मुनीम थे। पत्नी गायत्री २ बेटे  निर्मल और विमल और बेटी सुनीता और ऐसा परिवार था।ज्यादा रहीसी तो नहीं पर घर में सब खा पीकर खुश थे।निर्मल का मन पढ़ाई में कम लगता था इसलिए दसवीं के बाद पढ़ाई छोड़ वो बिजली का काम सीखने लगा।विमल पढ़ने में अच्छा था … Read more

बेटा अब तो मैं अपनी पोती से सारे अरमान पूरे करूंगी – मंजू ओमर : Moral Stories in Hindi

आज अमिता के पैर जमीं पर नहीं पड़ रहे थे।गोद में नन्ही पोती को लेकर वो ऐसे खुश हो रही थी जिसकी कोई सीमा नहीं थी। सबको दिखा रही थी देखो मेरे घर नन्ही परी आई है।कितनी प्यारी है न कितने नन्हे नन्हे हाथ पांव है , कितना प्यारा सा मुखड़ा है ,और देखो इसके … Read more

संस्कारी बहू – मीरा सजवान ‘मानवी’ : Moral Stories in Hindi

राधिका संयुक्त परिवार में पली बढ़ी।उसके परिवार में दादा-दादी,ताऊ-ताई ,उनके तीन बेटे  ,राधिका के माता-पिता ,राधिका और उसका भाई  सब मिल-जुलकर रहते थे। राधिका घर में सबसे छोटी थी और सबकी लाड़ली।  उसके दादा -दादी की तो उसमें जान  बसती थी। जहाँ चार बर्तन हों वे बजते ही हैं।छोटी-छोटी तकरार तो कहाँ नहीं होती लेकिन … Read more

बहुत से भी बहुत मीठी चाय – उमा महाजन : Moral Stories in Hindi

 पिछले नौ दिनों में ही प्रशांत को रिया की वास्तविक खुशी का अहसास हो गया था। अपनी व्यस्तता के बावजूद अब वह उसके घर वापिस आने पर चहकती हुई मिलती थी।        आज सुबह प्रशांत स्वयं भी रिया के उठकर बाथरूम में जाते ही उठ खड़ा हुआ और उसने गैस पर सुबह की चाय चढ़ा दी। … Read more

माँ मेरी पत्नी की जगह आपकी बेटी होती तो – के कामेश्वरी : Moral Stories in Hindi

सुबह सुबह सुहासिनी को घर के अंदर आते हुए देख रोहन ने खुशी से कहा अरे वाह तुम आ गई हो कैसे हैं बिटिया और दामाद उनके प्रश्न पूछने की देरी थी बस सुहासनी का चेहरा चाँद के समान चमकने लगा और कहने लगी मैं चाय बना लाती हूँ फिर हम बैठते हैं मैं सब … Read more

बड़ी बहू कर्म से – शिव कुमारी शुक्ला : Moral Stories in Hindi

कला ऐसा करना। कला शादी का सामान कहां रखवाया है। कला गेहूं कहां रखवाये। कला मसाले तैयार हुए कि नहीं। ऐसे ही अनगिनत काम जिनके लिए कला का नाम ही परिवार में गूंजता रहता। कला जन्म पद से बड़ी बहू नहीं थी किन्तु अपनी चंट चतुराई एवं कार्यो के प्रति सजगता, कर्मठता एवं अच्छी सोच … Read more

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