माँ मेरी पत्नी की जगह अगर आपकी बेटी होती – पूजा शर्मा : Moral Stories in Hindi

सुबह के 8:00 बजे थे।अभी-अभी बहू सोनाली के पिता की तेरहवीं रस्म में से लखनऊ से मेरठ तक का लंबा सफर करके आए जानकी जी के बेटा बहु बैठे ही थे, उनकी बहू सोनाली अपनी सास के गले लगकर हिचकियों से रोने लगी। जानकी जी उसे सांतावना देती हुई कहने लगी, अरे जाने वाले को … Read more

एक फैंसला आत्मसम्मान के लिए – अमित रत्ता : Moral Stories in Hindi

सावित्री आज दस साल बाद जेल से बाहर निकलती है जैसे ही गेट से बाहर आती है सामने नीली बत्ती वाली गाड़ी उसका इंतजार कर रही होती है। डीएसपी साहिबा और एक लड़की गाड़ी से बाहर निकलती है और आंसुओं से भरी आंखों के साथ सावित्री के सामने खड़ी होकर उसे सल्यूट करके उसके पैर … Read more

मत जाओ प्लीज ! – अर्चना सिंह : Moral Stories in Hindi

सागर ने नया जॉब नोएडा में ढूंढा था । आज कोलकाता से नोएडा जाने के लिए अपनी पत्नी पंखुड़ी के साथ निकल चुका था । साथ में सागर का छोटा भाई राहुल और बहन राशि भी थे ।  सागर पंखुड़ी की शादी के चार साल हो गए थे, अभी तक कोई बच्चा नहीं था । … Read more

तालमेल – लतिका श्रीवास्तव : Moral Stories in Hindi

बड़ी बहू,बड़ी बहू सुन सुन कर मेरे कान पक गए हैं।क्या मैं इस घर की बहू नहीं हूं छोटी हूं तो क्या हुआ मेरा कोई महत्व ही नहीं है।मेरी इच्छा मेरी राय मेरे निर्णय भी हैं।मेरा अधिकार भी इस घर में बराबरी का है हर काम में हर जगह बड़ी बहू बड़ी बहू… अब मेरे … Read more

आत्मसम्मान के साथ मायके आऊंगी। – अर्चना खंडेलवाल : Moral Stories in Hindi

अरे!! ये क्या अच्छा भला घर छोड़कर मायके में आकर बैठ गई है, कुछ शर्म भी है या नहीं, बेटी शादी के बाद ससुराल में ही अच्छी लगती है, इस तरह मायके में रहना शोभा नहीं देता है, फिर मायके वाले कब तक तेरा बोझ उठायेंगे? चाची ने तंज कसा और चली गई। सुधा निशब्द … Read more

आत्मसम्मान – मधु वशिष्ठ : Moral Stories in Hindi

——————– बेटा यह फैसला मैंने अपने आत्म सम्मान के लिए लिया है।  मेरा संबल तुम्हारे पापा ही है। आज भी उनकी पेंशन आती है और मेरी बीमारी पर मेरा इलाज आराम से हो जाता है । क्या वृद्ध होने पर माता-पिता की बच्चों पर निर्भरता की कीमत उनका आत्मसम्मान है? क्यों वृद्धजन अपना आत्मसम्मान बनाए … Read more

प्रेम की गांठ – दिक्षा बागदरे : Moral Stories in Hindi

भागीरथी जी थी ठेठ देसी गांव की महिला थीं। जन्म से लेकर ब्याह तक वह गांव में ही पली-बढ़ी। खेती-बाड़ी, गाय दुहना, लिपना-पोतना, चूल्हे पर खाना बनाना आदि काम कई वर्षों तक, उनकी दिनचर्या का हिस्सा रहे हैं। यूं तो उन्हें शहर में बसे वर्षों हो गए।   हर काम में होशियार थी। शहरी जिंदगी … Read more

वटवृक्ष – रवीन्द्र कान्त त्यागी : Moral Stories in Hindi

बरसों पुरानी बात है कि मैं ट्रेन से किसी काम से काशी जा रहा था। जब मैं अपनी रिजर्व सीट पर पहुंचा तो मेरी सीट पर एक अत्यंत साधारण कपड़े पहने झुकी सी कमर वाले साँवले से उम्रदराज व्यक्ति बैठे थे। उनके कपड़े सिलवट भरे थे और उनकी बेतरतीब सी दाढ़ी बढ़ी हुई थी। मैंने … Read more

एक फैसला आत्म सम्मान के लिए – उमा वर्मा : Moral Stories in Hindi

आज फिर आफिस में त्याग पत्र दे आया ।घर पहुंचा तो किरण ने सवाल किया “इतनी जल्दी आ गये सुबोध, बात क्या है “?”हाँ आज फिर नौकरी छोड़ दिया ” आत्म सम्मान के लिए ही यह फैसला किया है ।नहीं बेच सकता मै अपना आत्म सम्मान ।” पर हुआ क्या “? बताओ भी? चीफ मैनेजर … Read more

बेटी बहू में भेद क्यों – रश्मि प्रकाश : Moral Stories in Hindi

“ बहू सुनो इस बार तनीषा बच्चों की वार्षिक परीक्षा के बाद यहाँ आने वाली है … तो उनके लिए जरा कमरा तैयार करवा देना और उस कमरे के वॉर्डरोब में जरा जगह खाली कर देना वो लोग पन्द्रह दिन के लिए यहाँ रहने आ रहे हैं तो उन्हें किसी तरह की परेशानी ना हो … Read more

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