पैरों की धूल समझना – रंजीता पाण्डेय : Moral Stories in Hindi

रीता और रमन की शादी को पंद्रह साल हो गये थे । रीता की शिक्षा हिंदी मीडियम से हुई थी । जिस कारण उसको  अंग्रेजी बोलने में असुविधा होती थी । लेकिन हिंदी में उसकी पकड़ बहुत अच्छी थी ।रमन  रीता को” अपने पैरों की धूल समझता” था ।  बात बात पे गवार शब्द का … Read more

महाकुंभ स्नान – अविनाश स आठल्ये : Moral Stories in Hindi

नहीं बेटा, तू रहने दे…अभी तो तेरी नई नौकरी लगी है, तुझे इतनी जल्दी छुट्टी कैसे मिलेगी? वैसे भी घुटनों के दर्द के कारण मुझसे चला नहीं जाता, मैं नहीं जाऊंगी महाकुंभ स्नान करने को… सुधा ने वाट्सएप कॉल पर अपने इकलौते बेटे शिशिर से कहा.. सुधा के बेटे शिशिर ने लगभग 10 महीने पहले … Read more

अपने नाम से पहचान – विभा गुप्ता : Moral Stories in Hindi

  ” सीमा..चलो ना…नये जीएम की वाइफ़ की पहली मीटिंग हैं..सुना है..वो स्पीच(भाषण) बहुत अच्छा देती हैं।कल ‘महिला-दिवस’ भी तो है..वो ज़रूर कुछ अच्छा ही बोलेंगी।” राधिका ने अपनी सहेली से कहा तो वो ना-नुकुर करने लगी।तब राधिका बोली,” ठीक है..तुम चलो, अगर बोर होने लगी तो हम वापस आ जायेंगे।” वापस आने की कंडीशन पर … Read more

ठूंठ में जीवन बाकी है – सीमा प्रियदर्शिनी सहाय : Moral Stories in Hindi

शाम ढलने लगी थी। सूर्य देव अस्ताचल की ओर धीरे-धीरे अग्रसर हो रहे थे। आसमान शांत था ।पक्षियों का झुंड कोलाहल करते हुए अपने घोंसले की ओर बढ़ता जा रहा था। सब कुछ प्रकृति के नियमानुसार ही घट रहा था सिर्फ एक उन्हें छोड़कर। प्रकृति न जाने क्यों उनके ऊपर कुपित हो गई है ? … Read more

क्या रंग भेद सही है – संगीता अग्रवाल : Moral Stories in Hindi

” मेरी शादी की चिंता आप छोड़ दीजियेगा हाथ जोड़ कर विनती है आपसे नही करनी मुझे शादी। आप चाहे तो सुमि की शादी कर सकते है !” नम आँखों से नीति ने अपने माता पिता से कहा। ” पर बेटा ऐसे कैसे ये फैसला कर सकती हो तुम बड़ी हो तुम्हारी शादी नही होगी … Read more

तर्क – उमा महाजन : Moral Stories in Hindi

गेट की आवाज सुन कर उन्होंने बाहर झांका। रज्जो ही थी। रज्जो ने चुपचाप झाड़ू उठाया और ड्राइंगरूम से झाड़ू लगाना शुरू कर दिया। ‘यह क्या  रज्जो ! न नमस्ते,न दुआ-सलाम और सीधे ड्राइंग रूम से सफाई शुरू ? तुझे कितनी बार समझाया है कि हमारे कमरे से सफाई शुरू किया कर,लेकिन तुझे समझ ही … Read more

एक फैसला आत्मसम्मान के लिए – वीणा सिंह   : Moral Stories in Hindi

सोचा महिला दिवस की शुरुआत घर के नजदीक खुले वृद्धाश्रम में जाकर उनलोगों को कुछ पसंद का खिला कर, थोड़ा वक्त उनके साथ गुजार कर क्यों न किया जाए… सुबह की चाय पीकर नाश्ते के पैकेट के साथ निकल गई वृद्धाश्रम.. अक्सर जाते रहने के कारण सब से पहचान सी हो गई थी… मेरे जाते … Read more

एक फैसला आत्मसम्मान के लिए  : Moral Stories in Hindi

  बहू  कल मेरा नाश्ता भी नितिन के साथ ही बना देना। मैं भी उसके साथ दुकान पर जाऊँगा। बहुत दिन हो गए घर में आराम करते हुए। घर से बाहर जाऊँगा तो सबसे मिलना-जुलना भी हो जाएगा। जी पापा जी ठीक है, उनकी बहू मिताली ने कहा। रात को जब सारा काम निपटाकर वह कमरे … Read more

खुद की इज्ज़त करना सीखो – रोनिता कुंडु  : Moral Stories in Hindi

आप लोगों को एक सुझाव देना चाहती हूं, पता है आजकल शादी का लहंगा किराए पर मिल जाता है। जिससे हजारों रुपए की बचत हो जाती है और उसे हम शादी के अलग कामों में खर्च कर सकते हैं। वैसे भी शादी तो होनी अलग साड़ी में ही है, लहंगा तो बस कुछ देर के … Read more

पत्नी के विश्वास को टूटने नहीं दूंगा – शिव कुमारी शुक्ला  : Moral Stories in Hindi

ऑफिस से लौट कर विनय जैसे ही घर में घुसा कि मां की चिल्लाहट सुनकर वहीं ठिठक कर खड़ा हो गया। मां जोर-जोर से चिल्ला कर साक्षी को बेइंतहा लताड़े जा रहीं थीं और साक्षी चुपचाप सिर झुकाए खड़ी थी उसकी आंखों से आंसू निकल गालों पर बह रहे थे।अरी करमजली मेरी ही मति पर … Read more

error: Content is protected !!