आज मैंने एक फैसला लिया है अपने आत्म सम्मान के लिए – मंजू ओमर : Moral Stories in Hindi

हेलो वकील‌ साहब हां बहन जी  ,आप जरा घर आ जाइए कुछ काम है कुमुद जी ने कहा , ठीक है बहन जी मैं आता हूं।और थोड़ी देर में वकील साहब आ गए । कुमुद जी ने अलमारी से कुछ पेपर निकाले और वकील साहब की तरफ बढ़ा दिए । वकील साहब आपके सेठ जी … Read more

नव जीवन – चंचल जैन : Moral Stories in Hindi

चिलचिलाती धूप में, सिर पर आंचल ओढ मीता बढती जा रही थी।  “इतना अपमान? मेरे माता पिता गरीब है तो क्या हुआ?” “अपने बेटे का घर बसाने के लिए कैसे हाथ जोडकर आये थे सास ससुर जी।” मीता मन ही मन बडबडा रही थी। कैसे बीमार दादी का बहाना बनाकर झटपट शादी की थी ससुराल … Read more

ननंद – के कामेश्वरी : Moral Stories in Hindi

सुमन अपनी ननंद को लेकर मायके में भाई की शादी में शामिल होने के लिए पहुँची ।  उसकी ननंद श्रीजा इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करके एक बहुत बड़ी कंपनी में जॉब कर रही थी । नवीन की नज़रें बार बार श्रीजा की ओर आकर्षित हो रहीं थीं । वह जानना चाहता था कि इस बला … Read more

कृतज्ञता! – कुसुम अशोक सुराणा : Moral Stories in Hindi

“मन्या! दो कप चाय लाओ! साथ में गर्म नाश्ता” बच्चू जोर से चिल्लाया! उसे विश्वास ही नहीं हो रहा था कि उसकी प्रिय शिक्षिका वझे बाई (तब मैडम कहने का चलन नहीं था) उस के सामने खड़ी है! वह तपाक से उठा और उसने उनके पैर छुएँ और उन्हें कुर्सी पर बैठने की विनती की … Read more

ननद एक बड़ी बहन जैसी…. – अमिता कुचया : Moral Stories in Hindi

सुबह से सब काम करके दीपा किचन में रोटी बना रही होती है ,तभी उसकी ननद प्रिया आकर हूंः करके डराती है ,तब दीपा पीछे मुड़कर देखकर कहती- अरे दीदी आप अचानक हैरानी से !!तब वह उसे कहती- देखा भाभी मैनें डरा दिया ना…तो दीपा कहती- दीदी ना कोई फोन, ना मैसेज ,ऐसे भी डराता … Read more

ननद – अमित रत्ता : Moral Stories in Hindi

तुझे खाना ठोकने से फुरसत मील तो बाहर कपड़े पड़े हैं धोने को जब देखो मुहं चलाती रहती है खाने को। न काम की न काज की दुश्मन अनाज की हमारी छाती पे बिठा दी मूंग दलने को। तेरे बाप से तेरे खाने का खर्च पूरा नही हो रहा होगा इसीलिए बिना दहेज के फटाफट … Read more

स्वार्थ – अपर्णा गर्ग : Moral Stories in Hindi

आज तो बस हद हो गई, मां से अब बात करनी ही पड़ेगी। भाभी रोज किसी न किसी बहाने से मायके जाती रहती हैं और उनके बदले घर का सारा काम मुझे ही निबटाना पड़ता हैं,”पारुल बर्तन साफ करते करते खुद से बड़बड़ा रही थी।” जैसे ही घड़ी में ग्यारह बजे…दीक्षा, सुनीता जी से इजाजत … Read more

“ भाभी…. आपने मेरी जिंदगी बदल दी” – हेमलता गुप्ता : Moral Stories in Hindi

है भगवान…. निधि तुमने घर की क्या हालत बना कर दी है मैं अभी 4 घंटे के लिए बाहर गई थी इतनी में तो तुमने पूरे घर की दशा ही बदल दी, न सोफा के कवर सही से हैं ना बिस्तर पर चादर और रसोई का क्या  हाल करके रख दिया ऐसा लग रहा है … Read more

*सदाबहार* – मुकुन्द लाल : Moral Stories in Hindi

” उठो!.. जल्दी उठो!..” चारपाई पर सोई हुई जसोदा को उसके पति हरिहर ने उसे झिंझोड़ते हुए जगाया।   ” क्या हुआ?.. पागल  हो गये हो क्या? .. सुबह-सुबह..”   “ठेला गायब हो गया है, तुमको नींद सूझ रही है..”   “ऐं!.. ठेला नहीं है?.. कल शाम में तो घर के बाहर यहीं पर किनारे रखा हुआ था … Read more

का सन्ग खेलूं होली – रवीन्द्र कान्त त्यागी : Moral Stories in Hindi

“इस बार होली पर हम अपने गांव जाएंगे नलिनी।” समर ने ऑफिस से लौटते ही पत्नी से कहा। “गांव… कैसा गांव। समर तुमने तो कहा था कि गांव में अब हमारा कोई नहीं है। ना कोई नाते रिश्ते वाला। ना कोई संपत्ति न जमीन।” “हां मगर गांव तो है ना। और यादें हैं गांव की।” … Read more

error: Content is protected !!