“रिश्तो में नाराजगी सहन हो सकती है नफरत नहीं” – हेमलता गुप्ता : Moral Stories in Hindi

बहु…. जरा देखना यह वही राधा कृष्ण की मूर्ति है ना जो 3 साल पहले तुम्हारे पापा के रिटायरमेंट पर हमने दी थी किंतु यह क्या बात हुई उन्होंने हमारे 50वीं शादी की सालगिरह पर वही मूर्ति हमें वापस उपहार में दे दी यह तो गलत बात है, वह ऐसा कैसे कर सकते हैं? किसी … Read more

‘एक माफी और ढेर स्नेह’ – अन्जना मनोज गर्ग : Moral Stories in Hindi

     नयी-नयी शादी हुयी थी कनिका की। पगफेरे की प्रथम रस्म के साथ ही पति देवेश के साथ वह शहर आ गयी थी साथ में सासूमाँ भी आयी थी ताकि आधुनिक कान्वेंट शिक्षित कनिका को घर सँभालना सिखा सकें। सासूमाँ गाँव की भोली-भाली अपने उसी पुराने और सरल तरीके से काम करने वाली महिला थी। आजकल … Read more

दोस्ती – लतिका पल्लवी : Moral Stories in Hindi

 मधु, मालती दोनों पक्की सहेली थी। लगता था जैसे इन दोनों के बीच में “और” लगाना ही नहीं है,एक का नाम लो तो दूसरे का नाम अपनेआप मुँह पर आ जाता था। उनका कोई भी काम एक दूसरे के बगैर होता ही नहीं था। जब सहेलियाँ है तो स्कूल कॉलेज तो साथ जाएंगी ही परन्तु … Read more

एक माफी मांग लेने से यदि रिश्ते बच रहे हैं तो बचा लीजिए – मंजू ओमर : Moral Stories in Hindi

ये क्या बहू आज फिर से तुमने राजमा बना दिया अभी परसों ही तो बनाया था , मुझसे हजम नहीं होता पेट भारी भारी हो जाता है बहुत गरिष्ठ होता है मेरा पेट साफ नहीं होता है ‌। नहीं आज फिर से राजमा नहीं बनाया है परसों का ही है बच गया था तो क्या … Read more

छोटी सी सलाह – स्मृति गुप्ता : Moral Stories in Hindi

इतने काम के बीच वसुधा का मन किसी और ही सोच में डूबा था। डोरबैल सुनते ही,  दरवाजा खोला सामने प्यारी सखी वैशाली खड़ी थी, दोनों पड़ोसी होने के साथ, एक ही ऑफिस में काम भी करती हैं, इनमें बहनों सा रिश्ता है।   नीर (वसुधा की बेटी) की शादी को अब महीना भी नहीं बचा … Read more

विभीषिका – रवीन्द्र कान्त त्यागी : Moral Stories in Hindi

दरकते स्त्री पुरुष सम्बन्धों की विभीषिका, जहां तहां अपने रक्तिम चिन्न्ह बिखेरकर एक दर्द भारी दास्तां लिख जाती है। जेल के बाहरी परिसर में एक चालीस साल का पुरुष, मैला सा पायजामा, कंधे पर लाल अंगोछे से बार बार चेहरे का पसीना पौंछते हुए बेताबी से चक्कर लगा रहा था। फिर उसने पीपल की छाँह … Read more

मेरी माँ है – विभा गुप्ता : Moral Stories in Hindi

  ” सुमन बेटी..आज तुम्हारी परीक्षा का पहला दिन है.. दही-चीनी खाकर जा.. पेपर अच्छा होगा..।” कहते हुए शारदा सुमन को दही खिलाने के लिये आगे बढ़ी, तभी सुमन उनका हाथ रोकते हुए बोली,” कोई ज़रूरत नहीं है..।” और स्कूल जाने लगी।उसके पिता बेटी को डाँटने ही वाले थे कि शारदा ने उन्हें रोक दिया।     सुमन … Read more

पसंद बेटे की तो सजा बहू को क्यो ? – संगीता अग्रवाल : Moral Stories in Hindi

उसके विनम्र स्वभाव ने सबका दिल जीत लिया था। वो थी भी तो कितनी प्यारी जो उससे एक बार मिल ले उसका होकर रह जाता था हमेशा चहकती रहती थी मजाल है जो उसके चेहरे पर शिकन भी नजर आए। पर आज कैसे शांत पड़ी थी अस्पताल के बेड पर। बाहर घर वालों के साथ … Read more

ग्लानि – प्राची अग्रवाल : Moral Stories in Hindi

सानिया अपनी बेटी की पढ़ाई को लेकर बहुत ही सजग रहती। छोटी सी जान उसके पीछे पड़ी ही रहती सानिया। 12 वर्षीय अनिका सारे दिन किताबों में घिरी रहती। ट्यूशन में अगर टीचर छुट्टी कर लेती तो बबाल मचा देती सानिया। काम वाली बाई का भी एक-एक दिन का हिसाब गिन कर रखती क्योंकि सुघण … Read more

पिपासा – ऋतु यादव : Moral Stories in Hindi

#आँखों में खटकना  रंभा के स्कूल से आते ही आठ साल के तन्मय ने अपना हाथ दिखाते हुए कहा,” मम्मी, बंसी दीदी ने मारा और नाखून भी चुभा दिए। रंभा का अंदर से जी ज़ार ज़ार रो रहा था। हे भगवान! क्या करूं इस लड़की का। कौन कहदे, पांच साल बड़ी सगी बहन है। क्या … Read more

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