आज की नारी – कमलेश राणा : Moral Stories in Hindi

रिया बहुत ही प्यारी लड़की थी। एकदम रुई के फाहे जैसी सॉफ्ट स्किन,उस पर गुलाबी रंगत लिए हुए गोरा रंग और घुटनों से लंबी चोटी किसी को भी बार – लुभाने के लिए पर्याप्त थी।  मॉडर्न कपड़े पहनने का उसे गज़ब का शौक था वो जो पहन ले वही उस पर जंचता था फिर चाहे … Read more

मेरा बच्चा खाता ही नहीं – जया शर्मा : Moral Stories in Hindi

मिश्री, आओ सेव खा लो, मैंने अपनी दो साल की बेटी को आवाज़ लगाई. मेरी नटखट तूफान जैसी बेटी दौड़ते हुए आई और सेव देखते ही अपो अपो (Apple बोलने की कोशिश) कहकर मेरे हाथों से प्लेट ले कर सामने ही सोफ़े पर बैठ कर सेव खाने लगी. मेरी पड़ोसन शिल्पा भी वहां बैठी थी। … Read more

चिंता चिता एक समान – विमला गुगलानी : Moral Stories in Hindi

    “ अरे सरपंच साहब, आप यहां, तबियत तो ठीक है, कहलवा भेजते तो मैं हवेली में हाजिर हो जाता”, डा़ हेमंत ने गांव के सरपंच रघुनाथ जी को डिस्पैंसरी में देख कर कहा।  डा. हेमंत अल्मारी से कोई दवाई लेने गए तो उन्होंने खिड़की में से देखा कि सरपंच साहब चुपचाप अपनी बारी आने का … Read more

जनरेशन गैप – उमा महाजन : Moral Stories in Hindi

छः माह पूर्व गरिमा के भाई का विवाह हुआ था और भाई के विवाह के पश्चात गरिमा पहली बार मायके जा रही थी। छुट्टी न मिल पाने की वजह से उसके पति अभी तो उनके साथ नहीं आए थे, हां बच्चों की छुट्टियां खत्म होते ही उनकी वापसी पर उन्हें लेने आकर सबसे मिलने का … Read more

रिश्तों की मर्यादा – खुशी : Moral Stories in Hindi

रति एक खुशमिजाज लड़की थी उसे सबसे बाते करना ।मजाक छेड़छाड़ उसे बहुत पसंद थी।पर वो अपनी सीमा जानती थी।घर भर की रौनक थी वो।घर में बड़े भाई राजेश और उनकी पत्नी सुनीता थी।माता कमला और पिताजी रतन सिंह थे।राजेश और सुनीता दोनों बैंक में थे।रतनसिंह बिजली विभाग से रिटायर थे।राजेश और सुनीता के दो … Read more

एक शुभ विवाह ऐसा भी – मंजू ओमर : Moral Stories in Hindi

सोनिया गाड़ी की चाभी कहां है दो ज़रा,क्यों कहां जाना है चाभी मेरे पास है सोनिया बोली । तुम्हें पता है न गाड़ी दहेज की है और मेरे मम्मी पापा के पैसे की है । तुम्हारी इतनी औकात तो है नहीं कि एक गाड़ी खरीद सकों। इसलिए जब मुझे कहीं जाना होगा तो तभी चाभी … Read more

रिश्ता सफर का – प्रतिभा परांजपे : Moral Stories in Hindi

रमा जी ने अपना पर्स और बैग सीट पर रखा और एक चादर फैला कर बर्थ पर बैठ गई । ‘वाराणासी से पुणे’, साप्ताहिक एक्सप्रेस ट्रेन धीरे-धीरे प्लेटफॉर्म छोड़ रही थी। सफर करने वाले यात्रियों के रिश्तेदार हाथ हिलाकर उन्हें रुखसत कर रहे थे। कई माताएं अपने आंसू पोंछ रही थी, शायद अपनों से बिछड़ने … Read more

अनमोल तोहफा – विमला गुगलानी : Moral Stories in Hindi

आज सुबह से ही वेदांत का दफ़्तर में मन नहीं लग रहा था।न जाने क्यों मूड उखड़ा सा है। जब आदमी का मन ठीक न हो तो न चाहते हुए भी किसी न किसी से बिना बात के ही लड़ाई झगड़ा, मन मुटाव सा हो जाता है। दफ़्तर के माहौल में चुप रहना पड़ता है … Read more

रिश्तों की मर्यादा – सरिता कुमार : Moral Stories in Hindi

कंपकंपाती सर्दी , निरंतर बर्फबारी कटागला की धरती पर मानो उतर आया हो दूधिया बादल और बिछ गया हो उनके स्वागत में । कैब से उतरते ही छू गया उन्हें रूई के फाहा जैसा बर्फ । उन्होंने झट से मुट्ठी भर उठाया  और गोला बनाकर उछाल दिया आकाश की ओर …. और हंस पड़ी अपनी … Read more

अस्तित्व की लड़ाई – रत्ना पांडे : Moral Stories in Hindi

आज अचानक मीना ने अपनी मालकिन अनुराधा के पास आकर कहा, “मैडम मैं कल से काम पर नहीं आऊंगी।” अनुराधा ने बड़े ही चिंतित स्वर में पूछा, “अरे मीना क्या हो गया? क्यों नहीं आएगी?” “मैडम मैं गाँव जा रही हूँ, मेरे मायके।” “लेकिन इस तरह अचानक? क्या कोई इमरजेंसी …?” “नहीं मैडम जी मेरा … Read more

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