विश्वास की डोर से बंधे रिश्ते – प्रतिमा पाठक : Moral Stories in Hindi

रामपुर एक छोटा-सा गाँव, जहाँ ज़िंदगी आज भी पुराने ढर्रे पर चलती थी। मिट्टी के घर, पेड़ की छाँव में बैठकर बतियाते लोग, और खेतों की हरियाली में खिलखिलाते बच्चों की आवाज़ें ,यही पहचान थी इस गाँव की। इसी गाँव के एक कोने में, एक कच्चे घर में रहते थे हरिशंकर जी और उनकी पत्नी … Read more

नारी, अब नहीं बिचारी  – रोनिता कुंडु : Moral Stories in Hindi

क्या बात है अनु? आज तुझे आए हुए 15 दिन हो गए, पर तू अपने ससुराल जाने का नाम ही नहीं ले रही और ना ही इन दिनों मैंने तुझे दामाद जी से बात करते हुए देखा, क्या बात है सब ठीक तो है ना? सविता जी ने अपनी बेटी अनु से कहा  अनु अपनी … Read more

मत भूलो की ये भी मेरा परिवार है – मणि त्यागी : Moral Stories in Hindi

घर के लिविंग रूम में शर्मा जी अपने परिवार के साथ बैठे थे , बहु श्रद्धा रसोई से चाय लाकर मेज़ पर रख देती है और वहीँ खड़ी हो जाती है। शर्मा जी श्रद्धा से भी बैठने के लिए कहते है ..अरे बेटा खड़ी क्यों हो ? तुम भी बैठो …ये सुनते ही श्रद्धा भी … Read more

विश्वास की डोर – सुनीता माथुर : Moral Stories in Hindi

 आयुष ने मेडिकल कॉलेज में टॉप किया था और कॉलेज से विदेश ऐक साल के लिए आगे का कोर्स करने के लिए स्कॉलरशिप मिली थी ताकि वह किसी एक सब्जेक्ट में एक्सपर्ट डॉक्टर बन जाए। स्मिता और अनुराग बहुत खुश थे उनकी खुशी का ठिकाना नहीं था कि—- उनका बेटा विदेश जा रहा है! और … Read more

बस एक प्रेम – कंचन श्रीवास्तव आरज़ू : Moral Stories in Hindi

कई बार फोन करने के बाद भी जब नही उठा तो आंखों में आंसू लिये सोचने लगी वर्षों पहले जिसे जिंदगी से बेदखल कर दिया था  आज  उसी के पीछे मन भाग रहा  अचानक से माल में हुई मुलाकात ने उन दोनों को करीब ला दिया सबकी अपनी अपनी दुनिया होते हुए कभी कार बातें … Read more

मत भूलो कि ये भी मेरा परिवार है – मंजू ओमर : Moral Stories in Hindi

अरे मधु तुम तो आज आने वाली थी अभी तक  नहीं आई ट्रेन का समय तो निकल गया। मधु की सास     निर्मला देवी ने मधु को फोन किया।। हां मम्मी हां मम्मी अभी भैया भाभी के यहां दो दिन और रुकना है क्यों , भाभी की तबीयत खराब हो गई है उनके यहां … Read more

नीचे तबके के लोग – डॉ बीना कुण्डलिया : Moral Stories in Hindi

 कांती देवी ने नहा धोकर पूजा पाठ कर यानी अपने नित्य निजी काम निपटा कर आँगन में आती तेज धूप का आनंद लेने के लिए वहीं फर्श पर चटाई बिछाकर लेट गईं और मस्त हो भजन गुनगुनाने लगी। तभी उनकी बहु रत्ना दनदनाते हुए अपने कमरे से बाहर आई और कांती जी से बोली मांजी, … Read more

मत भूलो, यह मेरा भी परिवार है – मीनाक्षी गुप्ता : Moral Stories in Hindi

सरोज जी एक बहुत ही कड़क और सख्त मिजाज महिला हैं। उनके पति की मृत्यु को दस साल बीत चुके थे। सरोज जी के तीन बेटे — रवि, अमित और दीपक थे। तीनों की शादियाँ हो चुकी थीं। जब तक सरोज के पति जीवित थे, घर एक था, भोजन साझा था और रसोई की खुशबू … Read more

आँसू पीकर रह जाना – मीनाक्षी गुप्ता : Moral Stories in Hindi

गाँव के आखिरी छोर पर बने  एक छोटे से घर में, रहता था आकाश. घर में बूढ़े माँ-बाप थे, दो बहनें – बड़ी, रमा तो अपने ससुराल जा चुकी थी, पर छोटी, पूजा की शादी की चिंता में सब परेशान रहते थे . और थे दो भाई – बड़ा, सुरेश, जो गाँव की छोटी-मोटी दुकान … Read more

मत भूलो कि ये भी मेरा परिवार है – मीनाक्षी गुप्ता : Moral Stories in Hindi

शहर के एक शांत मोहल्ले में, एक तीन मंज़िला मकान में अभिषेक अपने माता-पिता के साथ रहता था. वह अपने माता पिता का इकलौता बेटा था और परिवार की गिनती मध्यम वर्गीय परिवारों में होती थी. घर में हमेशा सुख-शांति का माहौल रहता था और अभिषेक को कभी किसी चीज़ की कमी महसूस नहीं हुई … Read more

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