असहाय नहीं हूं, मैं! – लक्ष्मी त्यागी
रोहिणी तो जैसे टूट गई थी, जब उसके पति ने उसकी बाहों में अपना दम तोड़ा। अब वह क्या करेगी ,किसके भरोसे जीएगी ? एक अकेली औरत जात, जान को सोे झंझट नजर आ रहे थे। घर संभालेगी या फिर खेती-बाड़ी देखेगी। अभी दीनदयाल की ‘दाह संस्कार ‘की आग ठंडी भी नहीं हुई थी। रिश्तेदारों … Read more