असमर्थ नहीं हूं मैं – मंजू ओमर
रुक्मणि जी, रूक्मिणी जी, हां कहां खोई हुई हो आप कब से आवाज दे रही हूं सुन ही नहीं रही है। हां बेटा वो बस ऐसे ही ,बोलो क्या बात है,वो गोविंद आया है नये स्वेटरों का आर्डर देने और पिछले पैसे देने आफिस में बैठा है । अच्छा अच्छा आ रही हूं मैं, इतना … Read more