हमें बस, आपका आशीर्वाद चाहिए। – लक्ष्मी त्यागी
बरसों पुरानी हवेली के आँगन में शाम की धूप, तिरछी होकर बिखर रही थी। पीली मद्धम रोशनी दीवारों पर पड़ते हुए घर की पुरानी खुशबू को फिर से जगा रही थी—अचार की महक, माँ के हाथों की चाय, और पापा की हँसी, जो अब घर में कम ही गूंजती थी। नीम का वह पुराना पेड़, … Read more