बहु तुम्हारी ननद ही तो ले गई है तुम्हारी साड़ी, कोई गैर नहीं.. – निभा राजीव
बहु तुम्हारी ननद ही तो ले गई है तुम्हारी साड़ी, कोई गैर नहीं.. कमरे में फैली मिट्टी की सोंधी खुशबू और फैब्रिक कलर्स की महक रोली के लिए किसी इत्र से कम नहीं थी। वह पिछले पंद्रह दिनों से तसर सिल्क की उस साड़ी पर बारीक मधुबनी पेंटिंग कर रही थी। यह केवल एक साड़ी … Read more