बारिश और छाता – सुधा जैन

हम दोनों पति पत्नी शाम को 7:30 बजे के करीब प्रतिदिन घूमने जाते हैं ।प्रकाश नगर की ओर करीब 2 किलोमीटर की दूरी होती है। दिनभर की व्यस्तता, मेरा स्कूल, इनका आफिस ,फिर शाम का खाना, संध्या प्रार्थना, फिर घूमने जाना, वहां पर दो तीन मित्रों का परिवार भी मिलता है ।आपस में हंसी, आनंददायक … Read more

  मेरी प्यारी डायरी – सुषमा यादव

एक दिन आलमारी साफ़ करते हुए मेरे हाथ बहुत सारी डायरियां लगी,, मैंने चौंक कर देखा, इतनी सारी ,,,, यहां,कब कैसे,,, मैंने साफ़ करते हुए अपनी  सबसे प्यारी डायरी को उठाया और खुश हो कर उसे माथे से लगाया ,, *** ये मेरी डायरी, तुझको देखा है पहले कभी,, ,,, डायरी ने पलकें झपकाई,, और … Read more

परिवर्तन – गीता वाधवानी

सेठ रायचंद मुंबई के बहुत बड़े हीरा व्यापारी थे। उनकी दो संताने थी। पुत्र अक्षय और पुत्री काजल। सेठ जी का बेटा अक्षय अपने पिता से कुछ अलग व्यापार करना चाहता था और काजल अभी पढ़ाई कर रही थी।      सेठ जी अपने बेटे के कारखाने के लिए शहर से बाहर किसी गांव में जमीन देखने … Read more

प्रीतिभोज – ऋतु अग्रवाल

   मेरे पापा मूलत: राजस्थानी है पर चूंकि लगभग 100 वर्ष पहले उनके दादाजी व्यापार के सिलसिले में दिल्ली आ गए थे तो हमें राजस्थानी व्यवहार के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी। जन्म से लेकर शिक्षा दीक्षा सब दिल्ली में ही हुई और पापा के बहुत सारे रिश्तेदार भी दिल्ली ही आ गए थे तो … Read more

डोर विश्वास के – किरण बरनवाल

जिंदगी क्या है, किस चक्रव्यूह  में फंसा कर कैसे निकालती है ,ये तो मानव मन कभी आकलन ही नहीं  कर सकता। टेढी मेड़ी पगडंडियों में ना जाने कितने लोग मिलते हैं , कितने बिछड़ जाते हैं । साथ रह जाती है …सिर्फ  यादें जो कभी रुला जाती है तो कभी होठों पर बारीक सी मुस्कान … Read more

तस्वीर – गरिमा  जैन 

मामा जी की पुरानी हवेली जहां उनकी शादी की सालगिरह पर मैं गया था। मैं आज भी नहीं भूल सकता हूं उनके बैठक में लगी वह तस्वीर। उस तस्वीर को देखते ही उससे खिंचाव सा महसूस होने लगा। मैं उसे देखता तो ऐसा लगता मानो आज ही बनी हो। रानी रूपमती की तस्वीर थी ।वह … Read more

प्रणय अपहरण – रवीन्द्र कान्त त्यागी

आजकल न जाने क्यूँ बचपन की यादों के गुब्बारे रह रहकर दिमाग में फट रहे हैं। कहते तो ये हैं कि  इंसान के आखिरी समय में ऐसा होता है मगर, तुरंत तो ऐसा एहसास नहीं हो रहा है। बात पचास साल से भी अधिक पुरानी है। बचपन में हम जोधपुर में रहते थे। हमारा मकान … Read more

रोटी ~~ मधु मिश्रा

“हर्ष , रिचा… ऑर्डर करो न बेटा क्या क्या खाना है? मैं पापा को बुलाती हूँ, पता नहीं कहाँ रह गये वो! “कहते हुए नंदिता अपने पति को फ़ोन करने लगी… -“मैं मिस्सी रोटी और हर्ष तेरे लिए नान… और मम्मा  को… तो कुलचा पसंद है और पापा के लिए प्लेन रोटी  …..ठीक है न … Read more

जूही- गीता  वाधवानी

बोलो जूही, जो मैंने समझाया, वो तुम समझ रही हो ना, गुड टच और बैड टच क्या होता है? ममता अपनी 7 साल की बेटी  जूही को समझा रही थी। देखो बेटा, कोई भी आपको चॉकलेट, आइसक्रीम या किसी और चीज का लालच दे, आप उसकी बातों में मत आना और जूही भी समझने की … Read more

कागज के फूल नहीं, महकते हुए फूल – सुधा जैन

मिस्टर कपूर अपनी पत्नी और बेटे प्रियांश के साथ महाराष्ट्र के एक शहर में रहते है ।मिस्टर कपूर की इलेक्ट्रॉनिक की दुकान है और शहर में ही छोटा सा  घर है ।शादी होने के बाद उनकी जीवन संगिनी संगीता ने भी उनका हर कदम पर साथ दिया। घर की अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए कुकिंग, … Read more

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