गाँव चलेगा गंवार नहीं – अंजु अनंत

घर में मेरी शादी की बात चल रही थी, उम्र भी हो आई थी शादी की। वैसे तो हमारा पूरा परिवार गाँव में रहता है लेकिन पापा की नौकरी के कारण हम लोग हैदराबाद में रहते हैं। मुझे मेरे गाँव से बहुत लगाव है, अक्सर गर्मी की छुट्टियों में हम वहां जाते थे। भरा-पूरा परिवार … Read more

कन्या पूजन – डा.मधु आंधीवाल

आज  ठाकुर साहब की हवेली में बहुत चहल पहल थी । आज नवरात्रि का आखिरी दिन था । कन्या पूजन के बिना तो नवरात्रि के व्रत पूरे ही नहीं होते । ठाकुर साहब की हवेली में तो गांव के सब लोग लालियत रहते थे अपनी बच्चियों को भेजने के लिये । एक उत्सव सा मनाया … Read more

एक ठंडी रात – सुधा जैन

“स्माइल प्लीज” फोटोग्राफर ने दिवाकर, उसकी पत्नी सुजाता बेटे रेयांश और बहन नेहा से कहा । सभी मुस्कुराने  लगे और फोटो क्लिक हो गया ।उसके बाद फोटोग्राफर ने कहा” चलो अब आपका एक फैमिली फोटो हो जाए” नेहा फैमिली फ्रेम से दूर हो गई ….मैं सोचने लगा क्या बहन  फैमिली की फ्रेम में नहीं आती … Read more

सकून – रीटा मक्कड़

आज पूरी रात उसने आंखों में ही गुजार दी थी।   जब भोर के उजाले की किरणें खिड़की में से अंदर आती दिखी, और चिड़ियों के चहचहाने की आवाज कानों में पड़ी तब उसे सुबह होने का आभास हुआ। उठ कर जब मुँह धोने लगी तो शीशे में देखा आंखें सूजी पड़ी थी । आंखों … Read more

चक्रव्यूह – कंचन शुक्ला

सुहान और सुबानी की शादी हुई। तीन साल बीतते ही, ग्यारह महीने के सृजन का पिता बन गया, सुहान। आज उसे गोद में हँसाते खिलाते होटल में दाखिल हो रहा है। क्या नही था?? पर सुहान को लगता जैसे कुछ भी नही हो। पहली बार सुबानी को कॉलेज के उत्सव में देखा तो दिल दे … Read more

” ख्वाबों की सौगात ” – Inspirational Story In Hindi

 कॉलेज के सभी छात्र छात्राओं ने पिकनिक पर जाने का प्रोग्राम बनाया और सब साइकिल पर ही निकल पड़े, मौसम बहुत ही दिलकश था l सुनहरी धूप खिली हुई थी और इक्के दुक्के  बादल आसमान में तैर रहे थे l पिकनिक स्पाट बहुत ही खूबसूरत था l वहां पहुंचकर प्रकृति की गोद में बहुत ही … Read more

 वापसी – Short Story In Hindi 

जिस दिन से शिखा का जन्म हुआ था उसी दिन से उसके मम्मी पापा नें ठान लिया था कि हमलोगों की एक ही संतान हमारी फूल सी प्यारी बच्ची शिखा ही रहेगी । और उसी दिन से उसके मम्मी पापा का एक ही ख़्वाब था कि अपनी बिटिया को डाक्टर बनाएंगे ।        भगवान की … Read more

मुस्कुराते नन्हें सपने – मीना माहेश्वरी

बचपन में जब भी मैं किसी को पुरस्कृत होते देखती तो मुझे बड़ा अच्छा लगता,  मुझे हमेशा लगता की मैं  जिस किसी काम को करूं, बढ़िया करूं, लोग मेरी भी तारीफ़ करें। मैं कहानियां पढ़ती,और अच्छे किरदारों से प्रभावित हो उनके जैसे बनने की कोशिश करती। ठीक से याद नही हैं ,शायद कक्षा  चार मे  … Read more

स्वाद – कमलेश राणा

मम्मी आज फिर पोहा बना दिया,,,सैंडविच कितने दिनों से नहीं बनाये आपने,,, बहू मेरा दलिया बन गया क्या,,, अभी लाई मां जी,, क्षिप्रा, जरा अखब़ार और चश्मा तो देना मेरा,, जी ,बाबूजी,, क्षिप्रा,मेरा टिफ़िन तैयार हो गया क्या,, सुबह से सांस लेने की फुर्सत नहीं,,चकरघिन्नी हुई जा रही है,,,जरा भी वक़्त नहीं मिलता अपने लिए … Read more

मन तो बच्चा है जी – भगवती सक्सेना गौड़

ट्रेन अपनी गति से भाग रही थी, स्कूल की तरफ से एनसीसी की लड़कियों को लेकर कुछ शिक्षिकाओं को  इलाहाबाद भेजा था । उनमे से एक अनिता का वहां कभी मायका भी हुआ करता था, आज वो फूली नही समा रही थी। 40 वर्षो के बाद ये  बहुमूल्य पल उसके सामने थे और यादों का … Read more

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