नया पन्ना  – डा. मधु आंधीवाल

#ख़्वाब मां आज मेरा फाइनल इन्टरव्यू है आज तो कुछ बोलो मां केवल तुम्हारे बोल सुनने को मैं तरस गयी । मां पापा और सब परिवार वालों की सजा मुझे क्यों दी मां ? ये एक विनती उस यौवना की थी जिसका नाम युविका था । वह मौन साधिका अपूर्व सुन्दरी कभी यौवनावस्था में चांद … Read more

बरगद की छांव में – संजय मृदुल

गांव के बाहर तालाब के किनारे एक विशाल बरगद का वृक्ष था, कोई नहीं जानता था कितना पुराना है वह। जितनी मुँह उतनी बातें। बुजुर्ग बताते की दो सौ साल से भी पुराना है। सुबह के समय तो वहां काफ़ी चहल पहल होती, गांव के लोग निस्तारी के लिए तालाब का उपयोग करते। एक घाट … Read more

भाभी – गरिमा जैन

एक दिन जब मैं एक दुकान पर कुछ सामान खरीदने गई तो अचानक भाभी का संबोधन सुनकर मैं चौक पर दुकान वाले को देखने लगी। वह मुझसे कह रहा था “अरे भाभी जी पसंद न आए तो वापस ले जाइएगा “ मैं जैसे बहुत ही असहज हो गई ।भाभी, यह शब्द जो मुझे सुनने में … Read more

 जिम्मेदारी – मनीषा भरतीया

#ख्बाब जिन्दगी में ख्बाब हर कोई देखता है… लेकिन सब के ख्बाब पूरे नही होते… और कभी ख्बाब पूरे तो होते है… लेकिन उस रास्ते पर चलकर जिसपर इंसान मजबूरी वश जिम्मेदारियों को ढोने के लिए चलता हैं… हमारी आज की कहानी इसी पर आधारित है…  चंचल 14 साल की  शालीन और समझदार लड़की…. दीनानाथ … Read more

ऐसा क्यूँ?? – नीरजा नामदेव

एक लड़की जब शादी करके अपने ससुराल आती है तो कितने सपने लेकर आती है वह सबको अपना बनाना चाहती है ।नये रिश्तो को बांधना चाहती है। उसे सब कहते हैं अब तुम अपने घर जा रही हो तो वह आकर ससुराल को ही अपना घर समझने लगती है।।       ऐसे ही सपने लेकर मैत्री अपने … Read more

घुटन – के कामेश्वरी

निकिता ऑफिस से घर आई तो माँ ने कहा निकी तेरे लिये कोरियर आया है । जी माँ देख लेती हूँ । मैं हाथ मुँह धोने जा रही हूँ । आप चाय बना दीजिए न प्लीज़ । निकिता टावेल से मुँह पोंछते हुए आती है और सोफ़े पर बैठकर कोरियर हाथों में लेती है खोलने … Read more

ख़्वाब है या हक़ीक़त : – मुकेश कुमार (अनजान लेखक)

—————- उसके कई बार पुछने पर भी नहीं बता पाया। बस सर पर हाथ रख कर बैठा रहा। गर्मी और बरसात का मौसम ख़त्म होने के बाद जो गुलाबी और सुनहरी सर्दी आती है न, वो पुरी तरह मगरुर हो कर अपना एहसास कराने लगी थी। पंखा भी एक नम्बर में चल रहा था और … Read more

भ्रूण हत्या – प्रीती सक्सेना

मैं  डॉक्टर शोभा अपने शहर की जानी मानी स्त्री रोग विशेषज्ञ हूं,, सुबह से शाम हो जाती है,, सारा दिन महिलाओं और उनके नन्हें नन्हें, बच्चों में ही निकल जाता है,, कितना अधिक कष्ट सहकर,, जन्म देती है एक मां,, मैं बच्चों का जन्म तो करवाती हूं,,, पर उस दर्द का अनुभव मुझे नहीं है,,, … Read more

दृश्यम, पाषाण होते रिश्ते,  –  रीमा ठाकुर  

नाइट डियुटी पर  एक हप्ते के लिए आज आरक्षी अजय  शर्मा .को भेजा गया था!  नयी चौकी पहला दिन, नयी जगह, नया अनुभव “ वैसे करने के लिए ज्यादा कुछ नही था!  पास ही  एक पुलिसकर्मी वहाँ के आसपास के बारे मे बता रहा था!  बहुत बडी चौकी न थी, वह छोटा सा कस्बा तहसील … Read more

राज – सुधा शर्मा

मम्मी आज सब्जी बहुत अच्छी बनी है। अच्छा… और ले लो। गौरी ने राजन को और सब्जी देने के लिए हाथ बढ़ाया ही था.. कि पड़ोस से आते हुये शोर ने उसके हाथ कुछ सेकंड के लिए थाम लिये। क्या हुआ हमेशा शांत रहने वाले यादव जी के घर में यह शोर कैसा?वह मन ही … Read more

error: Content is protected !!