बबूल पर आम नहीं लगते – सरला मेहता

मिसेस वागले का जवाब नहीं। आदर्श गृहणी,जागरूक समाजसेविका व व्यवहार कुशल जगत आंटी जी हैं।गत बीस वर्षों से घर परिवार की बागडोर उनके हाथ में हैं।सास ससुर व पति महाशय भी उनकी राय लेते हैं।उनके बिना घर का पत्ता भी नहीं हिलता। रिश्तेदारी व मित्र मंडली में कोई भी कार्य हो आंटी जी को सबसे … Read more

एक शहीद के उद्गार…

माँ, जन्म तूने मुझे था दिया आज अंतिम सफर पर मैं चल दिया पर, दुखी न होना, कोख लजाई नहीं मैंने तनकर सीने पर गोली खाई है मैंने अंतिम समय भी गोद तेरी याद आई छुटकी की तरह करनी पड़ेगी ,मेरी भी विदाई लेकिन माँ मेरी, तुम आँसू बहाना नहीं क्योंकि  तेरे बेटे ने हार … Read more

वो बचपन मेरा लौटा दो ना

जिंदगी एक मौका दिला दो ना , वो बचपन मेरा लौटा दो ना ,,,,, वो माँ का आंचल ओढ़ा दो ना, वो पापा की चवन्नी दिला दो ना,   वो सखियां पुरानी मिला दो ना , जिन्दगी एक मौका दिला दो ना , वो बचपन मेरा लौटा दो ना ,,,,, वो भाभी का प्यार दिला दो … Read more

रिश्ता दिलों का…….!!!! – सरगम भट्ट

  आज काव्या आलमारी करीने से लगा रही थी , उसी में उसकी एल्बम मिल गई “…!! जिसको ना जाने कब से उसने देखा भी नहीं था।        एल्बम पलटते हुए उसकी नजर एक फोटो पर जाकर टिक गई ! कितनी प्यारी थी वो , लगता ही नहीं था वह किसी और की बेटी है “…!! … Read more

रक्षा सूत्र – सुधा शर्मा

‘कुछ रिश्ते सिर्फ़ चाहतों के रिश्ते होते हैं  , रूह में बसे रूहानी रिश्ते होते है।           ऐसा ही तो रिश्ता था सुमि और समीर का। न राह एक , न मंजिल , समीर की अपनी जिम्मेदारियां और सुमि की अपनी तन्हा जिंदगी । बस शब्दों और स्वरों का रिश्ता था दोनों के बीच। शब्द सुमि … Read more

फरिश्ता – कमलेश राणा

बात 1947 की है,,हमारे दादाजी सेंट्रल बैंक में जॉब करते थे,, उस समय उनकी पोस्टिंग पंजाब के लायलपुर में थी,,यह स्थान बंटवारे के बाद वर्तमान समय में  पाकिस्तान का हिस्सा है,, हमारी दादीजी गोरी चिट्टी बहुत खूबसूरत महिला थीं,,,वह अक्सर वहाँ के मजेदार किस्से सुनाया करतीं थीं,, वहां वह कंपनी बाग में घूमने जातीं थीं,,इसमें … Read more

रील V/S सिनेमा –  अरुण कुमार अविनाश

सिनेमा देखने क्यों जाऊँ ? उन बूढ़ी – बासी – बेनूर चेहरों का दीदार भी क्यों करुँ ? जिनका कहना है कि क्यों आते हो देखने ? हम तो तुम्हें बुलाते नहीं है। सेंसर हो चुकें दृश्यों का अवलोकन ! मैं क्यों करुँ ? अपने गाढ़े पसीने की कमाई क्यों बर्बाद करुँ ? सबसे बड़ी … Read more

मिनी – मीना माहेश्वरी

 बात 19_20 साल पुरानी है,   मेरे पास ट्यूशन पढ़ने एक बच्ची आती थी, ,,,,,,,,मिनी हां,यही तो नाम था उस बच्ची का, ,,,,,,,,एकदम अपने नाम की तरह नन्ही_ सी। पतली _दुबली,  सांवला रंग, मनमोहक मुस्कान, हमेशा तितली सी चहकती, फुदकती रहती ,,,,यहां ,,,,,से ,,,,,वहां।    नाम ही बस मिनी था उसका, थी एकदम “पॉवर हाउस” … Read more

मृग मरीचिका – मधुसूदन शर्मा

उत्तर भारत में जून माह के मध्य की दोपहरियां सूरज की रोशनी के सैलाब के साथ साथ उसका सारा ताप भी ले आती हैं। कस्बे से शहर को जाती सूनी और तपती सड़कें  प्यास से व्याकुल  मुसाफिर को मृग मरीचिका का भ्रम देती हैं । शहरों का हाल तो और भी बेहाल है। तेज गर्मी … Read more

अहं के घेरे – विजय शर्मा

शाम को पांच बज रहे थे। ऊंघते हुए चपरासी ने घड़ी की और उनींदी नजरों  से देखा और एकदम मुस्तैद हो गया,  टन टन टन….. जोर से घंटी की आवाज स्कूल परिसर में गूंजने लगी। स्कूल की सभी कक्षों में से झुण्ड के झुण्ड बालिकाएँ बन्दूक की गोली की तरह बाहर निकल रही थी। खनखनाती … Read more

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