अपना घर – प्रीति आनंद
******** अजीब से दोराहे पर खड़ी थीं आज मीरा जी! खुद के लिए निर्णय लेना उन्होंने कभी सीखा नहीं था। मायके में माता-पिता ने जो करने को कहा, उन्होंने वही किया। उन्हें गणित का विषय पसंद था पर बाबूजी ने गृह-विज्ञान में नाम लिखवा दिया तो वही पढ़ लिया! शादी के लिए बाबूजी ने जिस … Read more