त्याग – डॉ.अनुपमा श्रीवास्तवा

“माँ! पिताजी हरदम एक ही राग क्या अलापते रहते हैं?? काम के ना काज के दुश्मन अनाज के! मुझे उनके मुहावरे बिल्कुल भी पसंद नहीं हैं कह देना उनसे! जब से रिटायर क्या हुए हैं जीना हराम कर दिया है उन्होंने। जब देखो नसीहतों का पिटारा लेकर बैठ जाते हैं। खाली दिमाग….!” माँ ने जोर … Read more

साँवली – अनिल कुमार सिन्हा

हमारे एक मित्र है रमेश सिन्हा, वे भी इश्योरंस सेक्टर से ही जुड़े है तो अच्छा रिश्ता है उनसे    उन्हे एक बेटा और एक बेटी है नेहा जो रमेश बाबु की बडी संतान है वो पढने लिखने मे कुशाग्र बुद्धि की थी जब वो ग्रेजुएट की पढाई कर ही रही थी तो रमेश बाबु उसके … Read more

बंधुआ मजदूर  –  गोमती सिंह

दिसम्बर की कड़कड़ाती सर्दी का मौसम था अत: उस 10-12 वर्ष की मासूम सी राधिका के लिए असहनीय था , वो इसलिए कि वो एक बंधुआ मजदूर थी । तन पर  पहनने के उतरन के शिवाय उसके पास गरम कपड़े के नाम पर एक कर्कश सा कंबल था ।          ।घर का सारा काम निपटा … Read more

सब्ज़ी तो बहुत ही स्वादिष्ट है – अर्चना कोहली ‘अर्चि’

कंगना की शादी को दो महीने हुए हैं। आते ही उसने अपने अच्छे व्यवहार से सबका दिल जीत लिया। धीरे-धीरे करके उसने घर की सारी जिम्मेदारी अपने कंधों पर ले ली। कंगना के पति मयंक का स्वभाव भी बहुत अच्छा है। वे सबका बहुत ध्यान रखते हैं। कंगना की भी काम में मदद करते हैं, … Read more

चूल्हे की रोटी – अनुज सारस्वत

“पापा जी चलो ना शहर वहां मैंने फ्लैट लिया है” अनुभव ने गांव आकर अपने पिताजी से कहा पिताजी बोले “अरे बेटा रहने दे तू खुश है ना काफी है मैं तो ही ठीक हूं तेरी मां के जाने के बाद कहीं जाने का मन नहीं करता “ “अरे पिताजी चलो ना हो गई आपकी … Read more

लाड़ो – कमलेश राणा 

जानकी को प्रसव पीड़ा हो रही थी,, मानव ,,मानव ,,जल्दी कार निकालो,,जानकी को दर्द हो रहे हैं,,अभी हॉस्पीटल ले जाना पड़ेगा,, अभी निकालता हूँ,,माँ,, राधिका बेचैन हो रही थी,,बहू का दर्द उससे देखा नहीं जा रहा था,,साथ ही उसकी आँखो में डर भी था बेटी पैदा होने का,, उसे रह- रह कर अपने दिन याद … Read more

समर्पण – विजय शर्मा

रात के साढ़े दस बज रहे थे, स्कूटर स्टेण्ड से उतारकर जैसे ही राजेश ने सामने देखा तो एक बड़ी फोर्ड आइकान  गाड़ी उसके पूरे रेम्प को घेरे खड़ी थी। राजेश ने पास ही बनी पान की दुकान पर जाकर खड़े दो तीन व्यक्तियों से मुखातिब होते हुए कहा “आप में से जिसकी भी यह … Read more

मिसमैच जोड़ी…. – विनोद सिन्हा “सुदामा”

खुद को आईने में देख….आराध्या का मन दुखित हो रहा था..चेहरे पर रह रह कर कई दर्द आ और जा रहें थे..उसके चेहरे उभर आए कट मार्क्स के निशान उसके सीने को छलनी कर रहे थे…..असीम वेदना से तड़पती आराध्या खुद से नज़रे भी नहीं मिला पा रही थी… कितना गुमान था उसे खुद के … Read more

*दावत* – किरण केशरे 

दादू आज मेरा बर्थडे है ना, कहते हुए दस वर्षीय परी दौड़ते हुए आकर पीछे से दादू के कन्धे पर झूल गई थी। माधव जी ने उसका हाथ पकड़ कर आगे खींच लिया और बड़े लाड़ से बोले तो आज क्या प्रोग्राम है ,हमारी परी रानी का !!  पार्टी में कौन कौन आ रहा है … Read more

दुनियालाल – पूनम वर्मा

दुनियालाल ! हाँ ! इसी नाम से जानते थे हम उन्हें । नाम लेते ही एक विकराल-सी छवि स्मृति पटल पर उभरने लगती है । यह छवि धूमिल होकर भी यदा-कदा मेरी स्मृति के गलियारे में चक्कर लगा ही जाती है । लंबी-चौड़ी काया, कपड़े काले या शायद मटमैले-से ढीले-ढाले और कंधे से टखने तक … Read more

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