अस्तित्व – स्मिता सिंह चौहान

सरिता जी अपनी खिड़की पर खड़ी खुले आसमां में चहचहाती चिड़ियो को देखकर आनंदित हो रही थी ।तभी रितिका (दोस्त)ने उसे टोकते हुए कहा “चाय यही पियें या अन्दर ।ऐसे किसे देखकर मन्द मन्द मुस्कुरा रही हो ।” “यही पी लेते हैं, अरे कुछ नही इन पक्षियों को जब भी देखों, मन खुश हो जाता … Read more

” वो छोड़ गया मुझको” – सीमा वर्मा

‘ सुधाकर नहीं दिख रहे हैं तेरे प्रमोशन का इतना बड़ा फंक्शन और वही गायब है ‘ जब दरवाजे पर सुधाकर की राह तकती उनकी नजर थक चुकी तब यह दुखदाई सवाल दाग दिया था । ‘मेहुल’ कट कर रह गई माँ और बाबा शुरु से ही उसके इस तरह लिविंग में रहने के सख्त … Read more

धागों का डिब्बा – नीरजा कृष्णा

वो आज बहुत अनमनी सी थी। किसी भी काम में मन नहीं लग रहा था। उसकी मनस्थिति घर में किसी से नहीं छिपी थी। सब समझ ही रहे थे…आज उसके पापा की पुण्यतिथि है और वो उनकी ही यादों में खोई हुई हैं। उसकी सासुमाँ सविता जी  स्नेह से उसके लिए कॉफ़ी ले आई थीं … Read more

पुनर्जन्म – गीतांजलि गुप्ता

जब विधी की माँ का निधन हुआ था। उसकी आयु कुल पन्द्रह वर्ष थी। दो छोटी बहनों और भाई की जिम्मेदारी विधि के कंधों पर आ गई थी। पिता की नौकरी तो पहले से ही दूसरे शहर में थी। माँ अकेले ही सब को सम्भालती थीं। माँ बहुत बीमार पड़ गई, पिता जी अपनी ड्यूटी … Read more

बेचारी शैली – लतिका श्रीवास्तव

सन्डे की अलसायी सुकून भरी सुबह की अभी आंख भी नहीं खुल पाई थी कि मैन गेट की खड़ खड़ ने मीता को बिस्तर छोड़ने पर मजबूर कर दिया….हालांकि उसने वेट किया था कि शायद राजन उसके पति की नींद खुल जाए और वो दरवाजा खोल दें!!पर व्यस्त सप्ताह का आराम तलब संडे अपनी नींद … Read more

दो पाटन के बीच में – नीरजा कृष्णा

अम्मा की बड़बड़ चालू थी। आज का बहु रीना को सुना कर बोल रही थी,”आजकल की बहुएँ तो गजब हैंः सास ससुर तो फूटी आँख नहीं भाते। इन लोगों का बस चले तो” कहते कहते बात अधूरी छोड़ दी थी और कनखियों से प्रतिक्रिया के लिए कमर कसने लगी थी। पर ये क्या रीना तो … Read more

नयी परिभाषा – कल्पना मिश्रा

नाती का बरहों संस्कार बहुत अच्छी तरह से निपट गया तो मन को सुकून मिला। नीरा मेरी इकलौती बिटिया थी,तो मैंने भी अच्छे से अच्छा करने की कोशिश की थी..पर फिर भी डर लग रहा था कि लेनी-देनी और फल,मिठाई में कहीं कोई कमी ना रह जाये। लेकिन सबको खुश देखकर मेरी ये चिन्ता भी … Read more

कुशल तीरंदाज – दर्शना जैन

रक्षाबंधन के बाद चंदर स्कूल गया। दोस्तों की कलाई पर सुंदर राखियाँ बंधी देखी, सभी एक एक करके बताने लगे कि उन्होने अपनी बहन को तोहफे में क्या दिया, कैसे रक्षाबंधन मनाया, बहन के साथ कैसे मस्ती की। दोस्तों की बातों से चंदर का बावरा मन कोई बहन न होने से बेचैन हो उठा। बावले … Read more

समय – दर्शना जैन

अगले साल होना था मनोज का रिटायरमेंट परंतु उसने सालभर पहले ही रिटायरमेंट ले लिया, यह सोचकर कि बहुत हो गया काम, अब परिवार के साथ समय गुजारूँगा। छ: महीने में ही वह उकता गया, पत्नी बबीता घर के कामों में उलझी रहती, बेटों को अपने अपने काम से फुर्सत नहीं थी।        उस रोज दोपहर … Read more

उलझन  – हेमलता पन्त

ट्रेन के एसी फस्ट डिब्बे में भी मुझे एक अजीब सी घुटन महसूस हो रही थी, कारण सामने बैठा युवक, जिसके  किसी पुराने फिल्मी हीरो की तरह लम्बे -लम्बे बाल, लाल शर्ट, काली पेंट ,कमर पर कसी बैल्ट, हाथ पर सलमान खान वाला ब्रेसलेट किसी टपोरी से कम नहीं लग रहा था | एसी फस्ट … Read more

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