” आ, अब लौट चलें” (भाग-2) – नीति सक्सेना
सुबह पांच बजे तैयार होके सुरेश जी ने अमित के बेडरूम का दरवाज़ा खटखटाया।अमित ने आंखें मलते हुए दरवाज़ा खोला तो पाया कि मां ,पापा दोनों हाथ में अटैची और बैग लेकर तैयार खड़े थे। ” हम गांव वापस जा रहे हैं बेटा,सोचा जाते वक्त तुमको बता तो दें ताकि तुम मुख्य दरवाज़ा अंदर से … Read more