लौट आओ नर्मदा ” – डॉ .अनुपमा श्रीवास्तवा

सावन का महीना शुरू होते ही शिव जी को प्रसन्न करने के लिए इंद्र भगवान जोर शोर से अपने काम में लग गये थे। भोले नाथ पर अभिषेक करने के लिए रात दिन जल बरसा रहे थे । हर ओर हर -हर महादेव का नाद गूंज रहा था। शिवजी की प्रिया “प्रकृति” की छटा देखते … Read more

ओल्ड इज गोल्ड – भगवती सक्सेना गौड़

सुबह के व़क़्त रोज़ की तरह रवीना  ब्रेकफ़ास्ट बनाने में व्यस्त थी, राजन तैयार हो गए थे और ड्रॉइंगरूम में किसी से मोबाइल पर बात कर रहे थे।  हर काम का उनका निश्चित समय होता था, पल भर की भी देरी उन्हें बर्दाश्त नहीं है. पेपर पढ़ते-पढ़ते वे नाश्ता करते हैं और बिना कुछ कहे … Read more

ममतालय – सरला मेहता

बड़े से मैदान में क्रिकेट खेल रही दो टीमें ,,, ए में हैं मि पिल्लई का पदम, खान साहब का, भिसे जी का यश,देसाई जी की दिव्या,पॉल मेम का जॉन और चटर्जी बाबू की मौली। शेष बचे भजनसिंह दा बंटी, तिवारी जी का पंकज,,,इसी बीच बंटी ने ऐलान कर दिया, ” हाँ कुछ हमारे दोस्त … Read more

 बारिश भीगनें की असली खुशी – गुरविंदर टूटेजा

  युवराज व शुभम एक ही कक्षा व स्कूल में पढ़तें थे दोनों बहुत गहरें दोस्त थे…पर दोनों के परिवारों में जमीन-आसमान का अंतर था…सच कहूँ तो कृष्ण-सुदामा की जोड़ी थी…!!!!    शुभम पढ़नें में बहुत तेज था इसलिए  स्कालरशिप से उसका इतनें बड़े स्कूल में दाखिला हो गया था…वहाँ सभी पैसे वाले परिवारों के बच्चे … Read more

सज़ा – बरखा दुबे शुक्ला

ममता के ससुराल में पति प्रकाश के अलावा सास ससुर व एक छोटा देवर है ,जो लगभग बारह साल का व सबका लाड़ला है । पर  पता नही क्यों ममता को वो शुरू से ही खटकता ।मायका उसी शहर में होने से वहाँ आना जाना लगा रहता । जब भी मायके जाती ममता शुरू हो … Read more

एक वादा  – पुष्पा जोशी

तेज मुसलाधार बारिश हो रही थी।सुमि का बावरा मन आज फिर मचल रहा था,उस नदी को तैरकर पार करने के लिए मगर एक ऐसी बेड़ी थी,जो उसे जकड़े हुए थी।मन में एक बवंडर सा उठ रहा था।वह समझ नहीं पा रही थी कि उसके साथ क्या  हो रहा है। तभी  ‘लोट जाओ सुमि, आगे एक … Read more

 रिम झिम गिरे सावन  –  किरण केशरे

सुबह से रह रह कर बरसात हो रही थी, कभी तेज झड़ी तो कभी पानी की बरसती टप टप करती बूँदे,,,चारों तरफ सुहावना मौसम हो रहा था, दोपहर होने को आई, मैं बालकनी में झूले पर हाथ में भुट्टा लिए बैठी गुनगुनाते हुए शेखर के बाजार से आने का बेसब्री से इंतजार कर रही थी। … Read more

कॉफ़ी-कैफ़े ‘… डॉ कविता माथुर

“मॉम, कॉफ़ी !” अचानक ये सुनकर सुमि जैसे गहरी तंद्रा से जागी हो। ,’ये लड़का सरप्राइज़ देना कभी नहीं छोड़ेगा!’ सुमि ये सोचने ही लगी थी कि रोहन ने पास आकर अपना सिर मॉं की गोद में रख दिया । कैप्टन रोहन आमतौर पर अपनी ज़िम्मेदारी समझने वाला संजीदा अफ़सर था । बचपन में ही … Read more

ज़िंदगी की क़ैद से! – डॉ कविता माथुर

“परे हटो, मत परेशान करो मुझे, जाओ उड़ जाओ।”, उन नन्हे-नन्हे शलभों पर चिल्लाते हुए बुरी तरह खाँसने लगा था दिलदार सिंह । “पानी पी, पानी पी ”, बाहर खड़े गार्ड की आवाज़ पर कोने में रखी सुराही से पानी पीने के लिए उठा तो जर्जर घुटनों ने जवाब दे दिया और वो लुढ़क कर … Read more

यादें – सुधा शर्मा

 आज फिर वही हिमाचल की खूबसूरत वादी, दूर तक फैली हुई बर्फ के पहाड़ों की मनोरम छटा , चारों ओर हरियाली , ठंड का सुहाना मौसम।, बस फर्क इतना कि तब किसी के स्नेह व भावनाओं से सराबोर प्रफुल्लित मन और आज उसकी स्मृतियों में डूबता उतरता अवसाद ग्रस्त हो चुका मन।                यहीं इन्हीं वादियों … Read more

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