बरसात की वो रात – पुष्पा पाण्डेय

मंदिर में रात बीताने को मजबूर मास्टर  दम्पति को  नींद नहीं आ रही थी। तूफानी बरसात, कड़कते बादल और चमकती दामिनी ने उन्हें गाँव जाने से रोक दिया था। एक मित्र की पत्नी का देहान्त हो गया था। उसी के दुख में शामिल होने गये थे। आना तो कल सुबह चाहते थे, लेकिन किसी ने … Read more

रिटायर्ड आदमी की आत्मकथा – सत्य प्रकाश श्रीवास्तव

आप सोच रहे होंगे, “इस आदमी को बेहद खुशनसीब होना चाहिए। साठ साल तक सरकारी माल काटने के बाद अब नाती- पोतों के साथ जीवन का आनंद लेते दिखना चाहिए था। बेटे-बहुओं की हथेली पर इस आदमी के नखरे कुलांचे भरते दिखने थे। पर, यहां ये आदमी इस उम्र में..! ये तो दया का पात्र … Read more

आया सावन झूम के – अनुज सारस्वत

“चलो भाई टाईम हो गया आफिस का निकलो कि यहीं बसेरा डालना “ हमारे साथी ने साढ़े पाँच किलो वजनी हाथ हमारे नाजुक से कंधो के सारे तंतू हिलाते हुए कहा ,इधर हमारा कंधा पीसा की मीनार से चार अक्षांश पर झुका और हमारे चेहरे अंदर के क्रोध को बाहर आने से रोकने के लिये … Read more

हरियाली अमावस्या की वह काली रात” – अनिता गुप्ता

सावन के आतें ही मुझको अमावस्या की उस  घनी काली रात की याद आ जाती है। जो पतिदेव और मैंने दहशत में काटी थी। सावन की रातों में चन्द्र दर्शन कम ही होते है , क्यों कि काले – काले बादल चन्द्रमा को अपने आगोश में ले लेते हैं। इसलिए रातें अंधेरी होती है  और … Read more

वो कौन थी – कमलेश राणा

हमारा रोज का नियम था कि रात को काम निपटाने के बाद सारी बहुएं सासू माँ के पास जरूर कुछ देर के लिए बैठते थे,, सारे दिन में यही ऐसा वक़्त होता था जब सारी महिलाएं और बच्चे साथ फ्री हो कर  बैठते,,दुनियां जहान की बातें होतीं और सासू माँ बहुत सारे संस्मरण हमें सुनातीं,, … Read more

मुखौटा – अंजू निगम

कल बाजार जाना हुआ तो सोचा अपनी पूरानी सखी से भी मेल-मुलाकात कर लूँ|अरसा हो गया था उससे मिले |कई बार उलहाने दे चुकी थी,सोचा आज जाकर उसे चौंका दूँ| घर गयी तो नौकर ने दरवाजा खोला|अंदर अच्छी-खासी रौनक जमी थी|शायद कोई पार्टी चल रही थी|१०-१५ महिलाएं जुटी थी|पहनावे से रईसी झलकती| उन्हें देख अंदर … Read more

खाने का डिब्बा – सीमा वर्णिका

नंदू दरवाजे की ओट से अम्मा बाबू की बातें सुन रहा था । “नंदू के बाबू तुम एक खाने का डब्बा ..काहे नांहि लै लेत ..रोज खाना लिये बिगैर काम पर जात हौ “अम्मा कह रही थीं। ” अरे काहे पाछै परी रहती हो.. घरै से खाके तो जात हैं,” बाबू ने जवाब दिया । … Read more

24 कैरेट – अंजु पी केशव

 “सुनो आज तो मुझे रोज चाहिए ही चाहिए।” उखड़ गई नेहा और नीरज की शामत आ गई। सोलह सालों में जिसनें कभी खुद से कोई तोहफा न दिया, उसके लिए क्या रोज डे और क्या प्रपोज डे…. लेकिन इस बार तो मांँग कर लूँगी। यही सोच कर पीछे पड़ गई नीरज के।   “मेरे लिए क्या … Read more

बदलते रिश्ते की कहानी – अन्जु सिंगड़ोदिया

डेढ़ वर्ष पहले की घटना है। हाहवे पर अपने माता -पिता की खून से लथपथ लाश देखकर5  वर्षीय   नन्हें  अरुण ने पूछा ,क्या हुआ मेरे मम्मी  -पापा को क्या ? एक पुलिस वाले ने उसे गले लगाते हुए कहा –‘बेटा ,तू अनाथ हो गया ? अरुण ने मासूमियत से पूछा -‘अनाथ !.. वो-वो  कैसे … Read more

रॉंग नम्बर  –  सपना शिवाले सोलंकी

नरेंन्द्र ऑफिस से निकलकर हेलमेट पहनने ही वाला था तभी मोबाईल फोन घनघना उठा।  अनजान नम्बर से कॉल थी । उसनें जैसे ही हैलो कहा ,दूसरी तरफ से किसी लड़की की आवाज़ सुनाई दी, “भईया अम्मा जी को खूब तेज बुखार हो रहा ,जल्दी से दवा भिजवा दीजिए न “ ” हैलो ! कौन बोल … Read more

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