दोहरे मापदंड – गीतांजलि गुप्ता
“रसोई का सारा सामान फिर से इधर उधर रख दिया, कितनी बार बताया रोली मुझे मुश्किल होती है।” लता देवी अपनी बहू पर झल्ला रही थीं। “माँ ऐसे समान रखने से कुछ ज़्यादा जगह हो जाती है।” रोली अपनी सफ़ाई देते हुए बोली। “तुझे कितनी जगह चाहिए, काम तो अधिकतर मैं ही करती हूँ। उसके … Read more