मरना नहीं  – देवेन्द्र कुमार

=========== रामदयाल इस बड़ी दुनिया में अकेले रह गए थे। उनकी पत्नी की मृत्यु हो गई। वह दो-चार दिन ही बीमार रहीं। मोहल्ले वाले उन्हें अस्पताल ले गए। उन्होने ही भाग-दौड़ की। रामदयाल खुद बीमार थे। उनका लड़का मुंबई में रहता है। कई वर्षों से घर नहीं आया था। मां की मृत्यु का समाचार मिलने … Read more

रक्षा सूत्र ही सुरक्षा कवच हैं… –  संगीता त्रिपाठी 

 विभा निर्मला और किशोर जी की बहू थी उसने अनुज से प्रेम विवाह किया था। विवाह से पहले ही अनुज फौज में चला गया। विवाह के समय एक महीने की छुट्टी लेकर आया था। एक महीना कब बीत गया अनुज और विभा को पता नहीं चला। जब अनुज पोस्टिंग पर जाने लगा तो जाने क्यों … Read more

गुलाबी-बसंत –     मुकुन्द लाल

  उसकी आंँखों के आगे एक चमकदार गुलाबी कोहरा छा गया था, जो धीरे-धीरे संगीतमय ध्वनि के साथ छटने लगा। वृक्षों पर हरी-हरी पत्तियाँ मंद वायु के झोंकों के सहारे गले मिल रही थी, डालियों पर बैठी कोयल कूक रही थी, ‘ बसंतआ गया’, फूलों पर गुंजार करते भौरें गुन-गुना रहे थे, ‘ बसंत आ गया’, … Read more

आओ लौट चलें – सरिता गर्ग ‘सरि’

  श्वेत झीने परिधान में सरोवर से  निकली सद्य-स्नाता तुम किसी तपस्विनी का रूप धरे मेरा तप भंग कर गईं। मृणाल सी कटि तक लटके श्याम वर्णीय भुजंग का दंश पीता मैं ,नैनों के जाल में उलझा,जाने कितने शैल – शिखर पार करता अनजान घाटियों में उतर गया। तुम मेरे पास ही थीं कि माँ ने … Read more

शीतल झोंका – गीतांजलि गुप्ता।

शीना जैसे ही बैग उठा जब भी घर से निकलती  हमेशा अपनी माँ से झिडकी खाती माँ उसे हरेक बात में टोकती रहती उन्हें हमेशा बेटी से नाराज़गी ही रहती ये नहीं है कि शीना उनकी नाराजगी का कारण नहीं जानती पर क्या करे सब जैसा चल रहा है उसे बदलना इतना आसान भी तो … Read more

माँ की साड़ी – नीतिका गुप्ता

मां बेटी का रिश्ता होता ही ऐसा है दोनों आपस में अपना सुख दुख बांट सकती हैं लेकिन क्या बेटी की शादी होने के बाद बेटी का मां पर मां का बेटी पर कोई हक नहीं रह जाता।   मेरी शादी होने के बाद मेरी मम्मी  ने मुझे बिल्कुल पराया कर दिया। एक ऐसा ही … Read more

 ये कैसा रिश्ता है ? – स्मिता सिंह चौहान

हर लड़की की तरह मालिनी ने भी कितने सपने सँजोये थे अपने होने वाले राजकुमार की लेकिन उसे क्या पता था राजकुमार सिर्फ सपने मे अच्छे लगते  हैं असल ज़िंदगी की तो हक़ीक़त कुछ और होती है।  धूमधाम से शादी के बाद मालिनी अपने ससुराल पहुँच चुकी थी लेकिन जैसे ही सुबह हुई  “नहीं, मुझे … Read more

रिश्तों के रूप – रचना कंडवाल

“गरिमा तुम मेरी बेटी की तरह हो।” ये सुनकर गरिमा को काटो तो खून नहीं। प्रोफेसर श्रीनिवास की आवाज ने उसे सहमा कर रख दिया। गरिमा का कालेज में नया दाखिला हुआ था। गरिमा दिखने में बेहद खूबसूरत थी। चंप‌ई रंग,कत्थ‌ई आंखें, मोहक हंसी,कमर तक लहराते हुए बादामी कलर के बाल उस पर सोने पर … Read more

आधी हक़ीक़त आधा फ़साना- सब तुम्हारे लिए ही है  – कंचन शुक्ला

इंगिता से उसका पति इंद्रेश- सुनो!! सात दिन छः रातों का नाईटस्टे फर्न्स रिसोर्ट एंड होटल में बुक कर दिया है। नए साल पर जब मम्मी पापा आयेंगे, अबकी बार उन्हें दुबई भी दिखा देता हूँ। वे खुद तो कभी कहीं जाते नही, और ना जाने की सोचते हैं। इंगिता- ये तुमने अच्छा किया। उनका … Read more

दिखावे का दुःख – विनोद सांखला “कलमदार”

अपने बचपन के मित्र विनय की मम्मी के हार्ट अटेक से अचानक देवलोक गमन की ख़बर सुनते ही रात के 2 बजे पत्नी वर्षा को साथ लेकर विनय के घर पंहुचा तो देखा…!! वँहा पूरा माहौल गमगीन था। विनय के पिताजी सोफे पर आँखों में आंसू लिए बैठे है… विनय और दिव्या भाभी फूट फूट … Read more

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