दोस्ती कभी कैलकुलेटेड नहीं होती – गीतू महाजन
नमिता के साथ वाले घर में सुबह से चहल-पहल थी। अरसे बाद उस खाली पड़े घर में कोई रहने आ रहा था। नमिता ने अपनी बालकनी से देखा सामान से लदा ट्रक बाहर खड़ा था।यह देखकर नमिता के होठों पर मुस्कुराहट तैर गई और मन में विचार आया कि इसी बहाने वीरान पड़े घर की … Read more