देवदूत – कमलेश राणा
वो दिन जब भी याद आता है, सिहर जाती हूँ मैं,, उन दिनों मेरा ट्रीटमेंट दिल्ली में चल रहा था और मुझे गोविंदपुरी से रोहिणी जाना पड़ता था,, हम मेट्रो से जाया करते थे,, उस दिन बेटा आकाश और मैं मेट्रो स्टेशन पहुंचे तो भीड़ बहुत ज्यादा थी,, मेट्रो में एक बहुत अच्छी बात देखी … Read more