जिंदगी – संगीता त्रिपाठी

इंजीनियरिंग कॉलेज का पचासवां वर्षगांठ…,कॉलेज प्रशासन ने बड़े धूमधाम से मनाने की सोची …,बड़े आयोजन की तैयारी की , पुराने स्टूडेंट्स  को भी निमंत्रित किया गया ।        तीन दिन का प्रोग्राम कल से शुरू है ,रेवा आज सुबह ही दिल्ली पहुंची ,कॉलेज द्वारा आरक्षित होटल में सामान रख ,कॉलेज देखने का लोभ न रोक पाई … Read more

**प्रीत की रीत** – अंजली शर्मा

    “सुरभि वैसे भी अपनी सास शारदा के आये दिन अनाथालय जाने, अनाथालय में जाकर दान करने वहाँ के बच्चों में सामान बाँटने से तंग आ गयी थी कितनी बार मना कर चुकी थी लेकिन शारदा है कि मानती ही नहीं थी। यहाँ तक तो फिर भी ठीक था लेकिन, आज तो हद हो गयी जब … Read more

बेटियां घर की शान – सुनीता माथुर

प्रगति, जागृति, रचना तीनों ही लड़कियों के कारण ज्योति बहू को घर में सास के बहुत ताने सुनते पड़ते थे। सास हमेशा यही ताने मारती कि——– एक बेटा होता, घर का बारिस होता, कम से कम—– वंश का नाम तो——- बना रहता! लेकिन——— बहू के तो तीन लड़कियां हो गईं यह सब सुनकर ज्योति दुःखी … Read more

एक रिश्ता ऐसा भी ! – स्वाती जैंन !

निकल जाओ अभी की अभी मेरे घर से , मुझे लगा था शादी के बाद तुम हमारे घर को बच्चों की किलकारियों से भर दोगी मगर नहीं मेरा सपना तो कभी साकार ही नहीं होगा , मुझे और मेरे घर को तुम जैसी बांझ औरत की कोई जरूरत नहीं, मेरी मां को भी तुम जैसी … Read more

सम्मान या अधिकार – एम. पी. सिंह

रानू की रोमिल से शादी हुई तो वो छोटी बहु बनकर ससुराल पहुंची. संयुक्त परिवार मैं सास ससुर और जेठ जेठानी थे. रोमिल एक पढ़ा लिखा इंजीनियर था और घर परिवार भी अच्छा था. रानु एक पढ़ी लिखी संस्कारी लड़की होने के साथ साथ खाना बनाने मैं भी माहिर थीं इसलिए आते ही घर में … Read more

किस्मत वाली – गरिमा चौधरी 

“दीदी… मैं बिटिया की शादी के बाद ही लौटूंगी।” मीरा ने चूल्हे पर रखी दाल की आंच धीमी की और रसोई के दरवाज़े पर खड़ी लक्ष्मी की तरफ देखा। लक्ष्मी के शब्द सीधे उसके दिल में उतर गए थे। चेहरे पर थकान थी, मगर आंखों में कुछ ऐसा था—जैसे कोई खुशी और चिंता एक ही … Read more

पवित्र रिश्ता – आरती शुक्ला

समीर को यह बात शुरू से चुभती थी कि नंदिता हर मुस्कान से पहले जैसे अपने अंदर किसी दरवाज़े की कुंडी लगा लेती है। सोसायटी में रहते हुए भी वह लोगों से मिलती कम थी, ज़्यादातर अपने फ्लैट की बालकनी में बैठकर पौधों में पानी देती, या किताब लेकर खामोशी में खो जाती। पैर में … Read more

किस्मत वाली – दीपा माथुर

वो रिक्शे में बैठी बार बार पीछे मूड मूड कर देख रही थी। ये वही है ना? दिमाग उसी में चक्करघिनी सा बन गया। लगा तो वो ही…. कितना हसमुख  चेहरा था । कॉलेज में कितनी ही लड़कियां इसपर मरती थी और मैं भी तो उनमें से एक थी। रिक्शे वाले भैया से पीछे मोड़ने … Read more

फर्क बस यहीं हो जाता है – रोनिता कुंडू

वेदिका, कहां रह गई तुम? इतने कामों में एक काम तुम्हें ढूंढना भी रहता है, वेदिका..! वेदिका..! अनुज चिल्लाते हुए घर के हर एक कमरे में आवाज़ लगा रहा था।  तभी अनुज की मां अर्चना जी पूछती है, मिली क्या वेदिका? हे भगवान, बहू के बिना तो सभी के आंखों के आगे अंधेरा ही छा … Read more

अहसास – बीना शर्मा

,”मौसी जी आपने इतने सारे कपड़े क्यों रख दिए?” इनमें से कुछ कम कर दीजिए…. अब हमको समाज में दिखावा नहीं करना…… बस जरूरी कपड़े दे दीजिए* आकाश ने अपनी बहन की सास वंदना से कहा तो वंदना आकाश की बात सुनकर आश्चर्यचकित हो गई थी।         कुछ महीने पहले जब उसने अपने बेटे विनय का … Read more

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