नास्तिक – पिंकी नारंग

 मीरा के पड़ोस मे नई आयी थी आराधना |पहली बार मीरा ने उसे देखा तो देखती रह गई गेहुँआ रंग, बड़ी बड़ी बोलती आँखे, जो किसी को भी आकर्षित कर ले |बहुत ही पोसिटिव वाइब्स आती थी उससे, तभी तो पति सुमित भी सारा दिन आराधना के आगे पीछे घूमते रहते थे |कुल मिलाकर परफेक्ट … Read more

जिंदगी है सुख-दुख की पुरवैया – अर्चना कोहली “अर्चि”

मैं एक पब्लिशिंग कंपनी में संपादक के पद पर काम करती थी। मेरा विवाह बहुत मुश्किलों से चालीस की उम्र पार करने के पश्चात हुआ था । मेरे विवाह के समय सास- ससुर की उम्र 75 से ऊपर होने के कारण सारी जिम्मेदारी मुझ पर और मेरे पति पर थी। इस कारण नई नवेली दुलहन … Read more

खुशियों के दिये – सुधा शर्मा

कितना खूबसूरत है चारों तरफ रोशनी का नजारा ।कमला ने  शिवनाथ जी को शाल उढाते हुए कहा ,” अन्दर चलो , ठंड होने लगी है ।” “थोडी देर बैठो यहीं , कितनी सुन्दर रोशनी करी है सब ने   ।परसों  दीवाली है , कल मै भी थोड़ी सी लाइट लगा लूँगा ।”       ” मन नहीं … Read more

जिंदगी की धूप छांव का गणित – डॉ. पारुल अग्रवाल

आज सिया बहुत खुश थी आज उसकी बेटी महक विदेश से अपनी रिसर्च पूरी करके आ रही थी। वो उसके आने की खुशी में तरह-तरह के पकवान बना रही थी पूरे घर में फिरकी की तरह से दौड़ भाग कर रही थी। उसे ऐसा लग रहा था कि आज उसका सपना पूरा हो गया हो। … Read more

चिराग दिल का जलाओ – नीरजा कृष्णा

उस दिन बेटे का फोन आया था, “मम्मा, तुम्हारी बहुत चिंता होती है। तुम्हारी तबियत भी ठीक नहीं रहती। अब जिद छोड़ो और अपने पोते के साथ यहाॅं दिल्ली में आराम से रहो।” उनका मन बहुत द्रवित सा हो गया। वाकई अब अकेले रहने में बहुत परेशानी होने लगी थी। दस साल पूर्व पति के … Read more

गृहलक्ष्मी की लक्ष्मीपूजा !! –    किरण केशरे

आज दीपावली का दिन ! समय से भी पहले उठ गई थी मैं, त्यौहार का बड़ा दिन सौ काम !!  माँ पिताजी को सुबह उठते से चाय ,फिर दोनों बच्चों कुंतल ओर सिमी का उठते ही काम शुरू ! कभी मेरे कपड़े कहाँ तो मेरा शू कहाँ । बेटा इतना बड़ा हो गया,आठवीं कक्षा में … Read more

तुम तो ऐसे ना थे – रश्मि प्रकाश

घड़ी की सुइयों के साथ साथ आज अवन्ति के हाथ भी जल्दी जल्दी चल रहे थे….काम ख़त्म कर घर से निकलते हुए वो अपनी माँ सेबोली ,”मैंने सब कुछ तैयार कर दिया है , तुम और पापा वक़्त पर खाना खा लेना और दवाइयाँ भी याद से ले लेना।”  तभी माँ ने आवाज़ दिया ,”अरे … Read more

कभी-खुशी-कभी-गम – कुमुद चतुर्वेदी

भैया का ट्रांसफर भोपाल हो गया था,पर माँ वहाँ जाना नहीं चाहती थीं। कारण यहाँ ग्वालियर में ही उनकी दो बेटियाँ भी थीं मैं बस आगरा थी सो बच्चों की छुट्टियों में ही जा पाती थी।परंतु भैया भी मजबूर थे उनको अकेले कहाँ छोड़ते बुढ़ापे में।खैर भैया भाभी और माँ को लेकर भोपाल चले गये।वहाँ … Read more

त्रिशूल – नताशा हर्ष गुरनानी

मेरी भांजी और मेरी बेटी लगभग समान उम्र की है। दोनो बहुत अच्छी दोस्त भी है, बहनें तो है ही। मेरी बहन सिंगल मदर है तो वो अपनी बेटी को थोड़ा ज्यादा लाड़ से पालती है या ये कहा जाये कि मेरे घर मे सब उसे कुछ ज्यादा ही प्यार करते हैं। पर मै उसे … Read more

 माँ का आँचल – आरती झा आद्या

लॉक डाउन क्या हुआ, गोविंद घर ही बैठ गया। एक नामचीन फैक्ट्री में सुपरवाइजर था समीर। तनख्वाह भी अच्छी थी। रहने के लिए फैक्ट्री के अहाते में ही दो कोठरी मिली हुई थी, जहाँ वो अपनी पत्नी और तीन साल का बेटा समीर के साथ रहता था। वही कुछ जमीन पर पति पत्नी मिलकर थोड़ी … Read more

error: Content is protected !!