औरत हूं , मुश्किलों मैं जीना जानती हूं – अनुपमा 

आदरणीय मां , क्या कह रही हो आप मम्मी , निभाना पड़ेगा ? कर क्या रही थी मैं इतने सालों तक , समाज और बच्चों की खातिर ही तो निभाया सब । फिर भी आप मुझे ही बोल रहे हो । आप कभी नही समझ सकती हो मम्मी , आपने भी तो निभाया ही ,हर … Read more

सरमाया – अंजू निगम

“आई की नहीं अभी तक?” चाची भनभना गई। “अभी तो नहीं।”लेटे लेटे ही शंशाक ने जवाब दिया। ” चाय पत्ती लेने में इतना समय लगता है? एक काम बोलो तो वह भी ढंग से नहीं कर सकती। पता नहीं माँ ने क्या सीखाया है? इतने धीरे हाथ चलते है।” चाची का प्रवचन चालू था। ” … Read more

जब घायल हुआ आत्म सम्मान – सुषमा यादव

इनके नहीं रहने पर मैंने अपने नब्बे वर्षीय श्वसुर जी जिनको मैं, बाबू, बोलती थी,उनको अपने साथ अपने कार्यस्थल शहर ले चलने की तैयारी करने लगी, क्यों कि अब घर में कोई नहीं था, मैं अपने अस्सी वर्षीय पिता जी से मिलने अपने मायके गई,, वो भी अकेले ही थे,भाई भाभी शहर में थे, कुछ … Read more

घर से बेघर – विजय कुमारी मौर्य

जंगल के किनारे एक दरख्त…. के नीचे बैठे बुजुर्ग अपने दोनों हाथ ऊपर उठाकर अपने बच्चों के लिए दुआ मांग रहे थे, “हे ऊपर वाले माफ कर देना मेरे बच्चों को, शायद उनकी भी कोई मजबूरी होगी मुझे घर से निकालने की, या मेरी कोई कमजोरी। आज मेरी पत्नी जिन्दा होती तो शायद कोई रास्ता … Read more

कोई भी रिश्ता,स्वाभिमान से बड़ा नहीं – डॉ पारुल अग्रवाल

अंजली जिंदगी से भरपूर, हर पल को खुशी से जीने वाली लड़की थी। अपने मम्मी-पापा, दादा-दादी और छोटे भाई के साथ हंसी खुशी दिन बीता रही थी।बहुत अमीर तो नहीं थे वो लोग, पर बिरादरी में अच्छे खाते-पीते परिवार में उनकी गिनती होती थी। अंजली पढ़ाई में काफी होशियार थी,वो एक सामाजिक संस्था में जॉब … Read more

बहुरिया यह मेरा घर है और जैसा है वैसा ही रहेगा –  नीतिका गुप्ता 

नारायण  जी आगरा शहर के एक बहुत बड़े व्यापारी,, सुनीता जी उनकी धर्मपत्नी एक सभ्य, सुशील, आदर्श नारी…. बेटा जो पिता के व्यवसाय में मालिक बनने की इच्छा नहीं रखता बल्कि उसी व्यवसाय से संबंधित एक कंपनी में नौकरी करके अनुभव अर्जित कर रहा है,, बेटी जिसने अभी पढ़ाई पूरी की है और बच्चों के … Read more

वो मनहूस नौलखा – कुमुद मोहन

बिस्तर पर लेटी राधा छत पर घूमते पंखे की घूमती पंखुड़ियों को ध्यान से देख रही थी जिनके घूमने के साथ साथ जैसे वक्त का पहिया कई साल पीछे चला गया हो। सोचते सोचते यादों की किताब के पन्ने जैसे एक-एककर खुलने लगे। वक्त की स्याही धुंधली जरूर पड़ गई थी पर शब्दों के निशान … Read more

रक्षा मर्दन – रंजना बरियार  

शपथ ग्रहण के बाद माननीय मंत्री महोदय घर आने पर सीधे अपनीं अठासी वर्षीया माता जी के कमरे में पहुँचे… ”माँ… माँ आपका बेटा आज मंत्री हो गया है… वो भी आपका आशीर्वाद मिला तो समाज कल्याण विभाग ही मिलेगा…जिसके लिए मैं वर्षों से संघर्ष करता आया हूँ…” कहते हुए उन्होंने बिस्तर पर लेटी माँ … Read more

औरत का आत्मसम्मान  – बेला पुनीवाला

शादी के 15 साल बाद आज सुनीता के पति विशालने बातों ही बातों में किसी बात से नाराज़ होकर सब के सामने कहा, कि ” तूने आज तक किया ही क्या है ?  सिर्फ घर  पे खाना बनाना  और बच्चों को संभालना और वैसे भी आज कल बच्चें भी तुम्हारी बात कहाँ सुनते हैं ? … Read more

 मुन्ना का प्यार – बालेश्वर गुप्ता

   ये क्या बोल रहे हो, बेटा?तुम अमेरिका चले जाओगे तो हम इस उम्र में कैसे जी पायेंगे?यहाँ अपने देश में क्या कमी है, मुझे और तेरी मां दोनों को खूब पेंशन मिलती है, तुम भी कमा ही रहे हो, एक बंगला और एक फ्लैट हमारे पास है, बेटा वो सब हम तुम्हारे नाम कर देते … Read more

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