जीवनसाथी – सविता गोयल

आज फिर मनोहर जी पार्क का चक्कर लगाकर वापस आ गए, लेकिन सुधाकर आज भी घूमने नहीं आया था। मन में बहुत से विचार उठने लगे, “पता नहीं तबीयत ठीक है या नहीं??” घर आकर भी उन्हें बेचैनी हो रही थी। उनकी पत्नी सरोज जी चाय लेकर आई तो उन्हें चिंता में देखकर पूछ बैठी … Read more

कुछ तो लोग कहेंगे – डाॅ संजु झा

अस्सी वर्ष तक डॉक्टर उमा मरीजों की सेवा तन-मन से करती रही।सत्तर साल तक तो वह तन-मन से स्वस्थ  थी, परन्तु उसके बाद से ही उम्र ने उसपर  हावी होना शुरू कर दिया। लोगों ने भी कहना शुरू कर दिया कि इस उम्र में अब डॉक्टर उमा किसके लिए काम कर रही है? परन्तु उसने … Read more

कुछ तो लोग कहेंगे – अर्चना खण्डेलवाल

पायल भाभी, राखी आ रही है, आप अपने मायके भाई को राखी बांधने नहीं जा रही हो क्या ? पड़ोस में रह रही रीना ने एकदम से पूछा तो पायल झेंप गई। नहीं, मैं नहीं जा रही हूं!! मेरा कोई भाई नहीं है, होता तो मैं जरूर जाती.. और ये कहकर पायल अंदर चली गई। … Read more

विश्वास – एम पी सिंह

मां , एक बार कहा न कि मुझे अंदर नहीं जाना मतलब नहीं जाना, तुम अंदर जाओ। राहुल की मां, राहुल को भोले बाबा के मंदिर में आने के लिए बोल रही थीं, पर वो स्कूटी पर ही बैठा रहा और बोला मैं यहीं इंतजार करता हूँ। तभी एक बड़ी सी कार से साधारण से … Read more

कुछ तो लोग कहेंगे – करुणा मलिक

अरे मम्मी, एक तो इतनी गर्मी ऊपर से इतनी लंबी साड़ी ….. कुछ हल्के कपड़े पहना करो ना …. देखो तो पेट के चारों ओर कैसे रेड रैशेज हो रखे हैं आपको । हाँ…. क्या करुँ? शादी के बाद कभी ओर कुछ पहनने की सख़्त मनाही थी और अब तो पहना ही नहीं जाएगा शायद … Read more

क्या सोच कर मेरा ब्याह कर दिया… – रश्मि प्रकाश

“ सुरीली तेरे ससुराल वालों ने तुम्हें छोड़ ही दिया है क्या… देख रही हूँ साल होने को आया तू अब तक यही मायके में पड़ी है।” पड़ोसन जया चाची ने जैसे ही सुरीली से पूछा वो बिना कुछ कहे बरामदे से घर के भीतर चली गई  “ अब ऐसा क्या ही पूछ लिया बताओ … Read more

“मैं सिर्फ आपकी पत्नी नहीं, किसी की बेटी भी हूँ – अर्चना खण्डेलवाल 

“मैं सिर्फ आपकी पत्नी नहीं, किसी की बेटी भी हूँ। मेरा फ़र्ज़ सिर्फ आपके परिवार वालों की तरफ ही नहीं है। मेरा भी परिवार है, जहाँ मैंने अपने जीवन के 25 साल गुज़ारे हैं। आज मेरे मम्मी-पापा को मेरी ज़रूरत है और आप कह रहे हो कि मायके मत जाओ। साल भर में कुछ दिन … Read more

कर्मों का चक्र तो चलता ही रहता है। – मधु वशिष्ठ

——————–           बहुत समय बाद भावना को एक सेमिनार के सिलसिले में दिल्ली आना पड़ा। पूरी रात मां के साथ पुरानी यादें ताजा करते रहे। क्योंकि सेमिनार स्थल उनके पुराने घर के पास था तो भावना ने सोचा  कि वह ताई जी और ताऊ जी से मिलकर ही सेमिनार स्थल पर जाएगी।   उनका बचपन उसे पुराने … Read more

कर्मों का चक्र – खुशी

गोपाल अपने माता पिता का एक बेटा था।परिवार में उसकी दो बहने रति और मणि थे।पिता श्यामलाल सीधे साधे व्यक्ति जितना उन्हें कहां जाता वो उतना ही काम करते ।उनकी बीमारी की वजह से उन्होंने जल्दी ही काम छोड़ दिया था। उस समय गोपाल पढ़ रहा था।गोपाल का शिक्षण उसके मामा के यहां हुआ था … Read more

बदलाव – उमा महाजन

‘यह क्या छुटकी बहू ! तुम नए जमाने की होते हुए भी मेरी ज्यादा लाड़ली हो, तो इसका अर्थ यह नहीं कि हमारे पुराने सनातन रीति-रिवाजों में भी दखलंदाजी करने लगोगी । क्या तुमने कभी किसी के विवाह के निमंत्रण कार्ड पर नाना-नानी लिखा नाम देखा-सुना है ? अरे, हमारे जमाने में तो नाना-नानी अपने … Read more

error: Content is protected !!