बहू से उम्मीद तो दामाद से क्यों नहीं !! – मीनू झा

रेवती को समझ आ गया उसे अब क्या करना है.. क्योंकि इस मुद्दे पर जिस तरह विनीत का व्यवहार हो जाता है उसे बड़ा ही अजीब लगता है…मतलब…समझ ही नहीं पाती वो कि इतना सभ्य,सुशील संस्कारी और व्यवहारिक विनीत ऐसा क्यों करने लगता है,कारण पूछो तो कहेगा—पता नहीं क्यों मुझे अच्छा नहीं लगता…तुम उनकी बेटी … Read more

उम्मीद रखो पर स्वार्थी ना बनो! – प्रियंका सक्सेना

“आ जाओ ना माॅ॑ !भाभी को गर्मी में लू लग गई है, जरा सा बुखार ही तो है भाभी को और आप इस चक्कर में मेरी महीने ‌भर में एक बार होने‌ वाली किटी पार्टी बिगाड़ने पर तुली हो।”मालिनी ने बड़े अधिकार पूर्वक अपनी माॅ॑ से कहा, उसे पता है कि उसकी माॅ॑ गर्मी- सर्दी … Read more

एक औरत का माँ बनने  का सफर – मीनाक्षी सिंह

हम लड़किया बचपन से ही एक धारणा  बना लेती है कि बड़े होकर हमारी शादी होगी और फिर बच्चे और फिर हमारा जीवन ख़ुशी ख़ुशी बीतेगा. लेकिन ज़िन्दगी हर कदम पर कोई ना कोई नया संघर्ष देती है जिसकी वजह से हम टूट जाते है. मीता एक बहुत ही अल्हड़ सी मस्त मौला मिजाज की … Read more

आखिर औरत को ही सबकी उम्मीद पर क्यूँ खरा उतरना पड़ता हैँ ???? – मीनाक्षी सिंह

सनी -भाभी बाहर मेहमान आये हैँ ,,मम्मी कब से आवाज लगा रही हैँ ,,चाय तो दे आईये ! और हाँ मेरी अच्छी भाभी मेरे लिए एक सैंडविच और एक काफी भी रेडी कर दिजिये फटाफट ! मुझे अभी दोस्तों के साथ निकलना हैँ ! बांसुरी का देवर सनी सारी बात एक सांस में बोल गया … Read more

मेरी देवरानी की नजर में मेरी इज्जत क्या रह जाएगी..? – पूनम गुप्ता 

अरे “”बड़ी बहू संध्या तुम कहां बिजी हो अब तक पूजा की कोई तैयारी नहीं की और ना ही थाल सजाकर रखा है”” तुम्हें पता है ना मेरे छोटे बेटे की पत्नी छोटी बहू मेरे घर आने वाली है उसका स्वागत है ऐसे ही करोगी क्या दरवाजे की ओर देखती हुई संध्या की सासू मां … Read more

गुलाबी आभा – नीरजा कृष्णा

सविता का हॉल जगमग कर रहा था। आज उसके यहाँ किटी पार्टी का आयोजन था। थीम थी…पिंक या गुलाबी। सभी महिलाएँ एक से बढ़ कर एक गुलाबी साड़ियों में सुसज्जित थी। सविता की सासूमाँ आई हुई थीं अतः निर्णायक की भूमिका का भार उन्हीं पर डाल दिया गया था। वो किंचित अचकचा कर कहने लगी … Read more

हल्दी वाला दूध – कंचन श्रीवास्तव

जैसे ही रेखा ने कमरे में प्रवेश किया,कल गिरने पर ज्यादा लगी तो नहीं वहां बैठे सभी ने उससे पूछा। तो उसने कल की ही घटना के साथ साथ एक और बार की घटना का भी जिक्र किया।उसने बताया कि ” ज्यादा तो नहीं लगी, के थे हुए उस बार तो पति देव ने करवट … Read more

* प्यारे पापा * – मधु शुक्ला

वंदिता सबसे बड़ी थी, उससे छोटी नम्रता और प्रेरणा थीं। तीनों बहनें हर प्रकार से योग्य थीं। घर के काम हों या पढ़ाई लिखाई सभी में होशियार। माँ बाप कीं लाड़लीं लेकिन परिजनों और पड़ोसियों की आँख की किरकिरी थीं वे। कारण जो गुण उनके बेटों में नहीं थे। वे उनमें मौजूद थे। अपने माँ … Read more

मैं अपनी फेवरेट हूँ – चेतना अग्रवाल

“मैं अपनी फेवरेट हूँ और मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता कि कोई मेरे बारे में क्या कह रहा है। मैं वही करती हूँ जो मुझे अच्छा लगता है। दैटस् ऑल!” लीना ने कहा और अपना डाँस फिर शुरू करने लगी। जब लीना का डाँस खत्म हुआ और वो कमरे से बाहर आई तो उसकी सास … Read more

 इस बार ससुराल नहीं जाऊँगी… – रश्मि प्रकाश

रागिनी को जब पता चला कि वह माँ बनने वाली है तो उसकी ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा था ये यूँ तो उसका दूसरा बच्चा था पर ख़ुशी दुगुनी हो रही थी क्योंकि उसने अपने पति तुषार से यही कहकर दूसरे बच्चे के लिए हामी भरी थी कि पहले बच्चे के वक़्त मुझे महसूस ही … Read more

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