“बहूरानी या नाॅन पेड नौकरानी” – कुमुद मोहन
“लो बहूरानी संभालो अपना राजपाट! ,और मुझे छुट्टी दो इस जंजाल आज से इस घर की मालकिन तुम!” मुझे तो तुम्हारा ही इंतज़ार था कि कब आओ और इस घर गृहस्थी के झंझट से निजात पाकर मैं भी सुकून की सांस ले सकूं” नई बहू सीमा के गृहप्रवेश करते ही सासू मां शीला जी ने … Read more