बहू बेटी – डा.मधु आंधीवाल

सौम्या नाम ही नहीं स्वभाव की भी सौम्य थी । उदास सी खिड़की में खड़ी देख रही थी । पार्क में एकत्रित हरे परिधानों में गीत गाती सजी धजी महिलाओं को झूला झूलता देख रही थी पर उसकी जिन्दगी तो बेरंग हो चुकी थी । अच्छी खासी वैवाहिक जिन्दगी चल रही थी । इतना प्यार … Read more

कोना मायके का – भगवती सक्सेना गौड़

आज सुकन्या दीवाली की सफाई कर रही थी, सीढ़ी पर चढ़कर ऊपर की अलमारी के किवाड़ खोले। एक चरर्रर्रर सी आवाज़ हुई, क्योंकि ये अलमारी सिर्फ दीवाली के एक हफ्ते पहले ही खुलती थी। तभी एक लकड़ी का बक्सा दिखा, जिसमे सिर्फ उंसकी ही यादें थी, जिसमे सिर्फ उसके अपने थे, जिनका वो बहुत आदर … Read more

‘एहसास अपनों का!’ – प्रियंका सक्सेना

“मम्मी, विनीत का स्थानांतरण अहमदाबाद हो गया है, इसी महीने हम लोग शिफ्ट कर जाएंगे।” सुनंदा ने सरला जी को  बताया “बेटा, अभी तुम लोगों को लखनऊ आए एक साल ही हुआ है और फिर से ट्रांसफर हो गया?” आश्चर्य से सरला जी ने कहा “मम्मी, आप तो जानती ही हों, विनीत की सेंट्रल गवर्नमेंट … Read more

अलविदा भीगी आँखों से – गोमती सिंह

——सरस्वती और मंदाकिनी दोनों बैठकर आपस में पुरानी बातों को याद कर रहे थे।            सरस्वती बोल रही थी-पता है मंदाकिनी, मेघा जब स्कूल जाती थी तब मेरे से ही चोटी बनवाती थी । कभी-कभी उसकी चाची बोल देती “आओ मेघा मैं छोटी बना देतीं हूँ, माँ जी कुछ दुसरे काम में ब्यस्त है । ” … Read more

नया पन्ना —डा. मधु आंधीवाल

मां आज मेरा फाइनल इन्टरव्यू है आज तो कुछ बोलो मां केवल तुम्हारे बोल सुनने को मैं तरस गयी । मां पापा और सब परिवार वालों की सजा मुझे क्यों दी मां ? ये एक विनती उस यौवना की थी जिसका नाम युविका था । वह मौन साधिका अपूर्व सुन्दरी कभी यौवनावस्था में चांद भी … Read more

अनाम – सुधा शर्मा     

 अचानक सामने कुमार और रोहित को देखकर मै चौंक गयी । मैंने प्रश्न वाचक निगाहो  से दोनों की तरफ देखा मुँह से आवाज़ तक नहीं निकली। फिर कुमार की ओर मुखातिब हो कर कहा,’आप? क्या बात है?” इससे पहले कि कुमार कुछ कहते रोहित बोल उठा,”माँ,उनसे मत कहो कुछ मैं उन्हें यहाँ लाया हूँ ।”  … Read more

सुसाइड नोट – डॉ. सुनील शर्मा

न जाने क्यों, अब जीने की इच्छा ही नहीं रही. बूढ़े शरीर में दिमाग़ भी अब सुस्त हो गया है. आंखों की रोशनी और जीभ का स्वाद तो कब का चला गया.पेट में कुछ पचता नहीं. दांत भी एक एक कर साथ छोड़ गए. नहीं नहीं, कुछ बीमारी नहीं. बस थकान रहती है, चलने सा … Read more

भाई – सुधा शर्मा

रात में कोई दरवाजा खटखटा रहा था। देखा छोटा खड़ा था। भडभडाते हुए अन्दर आकर बरस पड़ा,’ये क्या भाई  , मुझे इतना पराया कर दिया? खबर नहीं कर सकते थे? इतनी परेशानी मे हो और मुझे खबर नहीं  ?मुझे दूसरों से पता चला।” फूट फूट कर रोने लगा वह।  मैने उसे गले लगा लिया ।’मै … Read more

सौतेली माँ – पूनम अरोड़ा

आरव जब छैः वर्ष का था तो दुर्भाग्यवश  उसकी माँ  का देहांत  हो गया। वह छोटा था किन्तु  माँ  के विछोह का दर्द  उसमें  उन सबसे कहीं  ज्यादा था जो उसकी माँ  के लिए शोक व्यक्त  करते थे। वे शोक  करने से अधिक उसके लिए अधिक संवेदना  प्रकट करते थे। “अब इस बेचारे  का क्या … Read more

सास “मुर्गी” नहीं बहू “बंदरिया” है – मीनू झा 

क्या नाम है तुम्हारा बेटा..–लगभग रोज पार्क में मिल रही उन आंटी ने उस दिन प्रिया को टोक ही दिया। प्रिया…आप हमारे बिल्कुल सामने वाले घर में आई है ना आंटी…भैया की मम्मी है या भाभी की?? बेटे बहू है मेरे सुकेश और रिया…आठ दिन हो गए आए यहां मुझे। आंटी बेटे के घर में … Read more

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