पहली नज़र का इश्क़ – निधि जैन

हेलो रति, क्या हम मिल सकते है, हाय समीर , अब हम ना ही मिले तो बेहतर है, तुम्हारी भी एक फैमिली है, और मेरी भी, रति ने जवाब दिया। रति फ़ोन कट करने ही वाली थी, कि दूसरी तरफ़ से आवाज़ आई… एक एक मिनट फ़ोन मत रखना, मेरी बात सुन लो, मैं बस … Read more

ज़िंदगी ना मिलेगी दोबारा – डॉ. पारुल अग्रवाल

प्रिया आज जब शाम को  की आज शाम को टहल रही थी तो पीछे से किसी ने डॉक्टर प्रिया कह कर आवाज़ दी, प्रिया एकदम से चौंक गई क्योंकि कम ही लोग उसके नाम के आगे डॉक्टर लगाते थे। उसने पीछे मुड़कर देखा तो उसकी ही सोसायटी में रहने वाली नीरजा थी।  औपचारिक बातचीत के … Read more

सारे फ़र्ज बहू के ही क्यूं? – कुमुद मोहन 

“बहू!तुमने सिया को फोन कर के उसकी सास  का हाल चाल नहीं लिया” रमाजी झुंझलाती हुई अपनी बहू अवनी से बोली जो ऑफिस से आकर घर में घुसी ही थी! “मम्मी!आप दिन में कई बार दीदी को फोन करती हैं आप ने नहीं पूछा? मेरे ऑफिस में आज मीटिंग थी मुझे जरा सा भी टाइम … Read more

मुखोटे – डा.मधु आंधीवाल

बानी आज सोच रही थी कि इन्सान इतने मुखोटे कैसे अपना लेता है । क्या उसका जमीर उसे कभी जगाता नहीं । अभी चार दिन ही तो हुये उस घर में जवान मौत हुये । सीमा और रमन उसके पड़ोसी कम  हितैषी अधिक थे । बानी ने जब अपना मकान बनवाना शुरू किया बराबर सीमा … Read more

तांत्रिक – कमलेश राणा

सेठ मनमोहन नगर के सबसे धनवान, दयावान और प्रतिष्ठित व्यक्ति थे,, लक्ष्मी की उनपर विशेष कृपा थी,, उनके द्वार से कोई भी खाली हाथ नहीं जाता था,, लोगों की दुआएं उन्हें भरपूर मिलती थी,,  वो बहुत बुद्धिमान भी थे,, पैसा कहाँ निवेश करके अधिकाधिक कमाया जा सकता है, वो बखूबी जानते थे,, काफी चल- अचल … Read more

माँ की पीड़ा – दीपनारायण सिंह

आज सुबह से ही उसकी आँखे नम थी वो किसी पीड़ादायी सोच में डूबी अपनी दैनिक क्रियाएँ निपटा रही थी।कल तक जो चरण चपल जान पड़ते थे,आज पता नहीं क्यों लड़खड़ा रहे थे।आज उसके हाथ से आँचल के छोर छूट नहीं रहे थे।कोई निकलते आँसू को देख न ले,इसीलिए पसीना पोछने के बहाने बार-बार अपनी … Read more

पैसा और पुत्र मोह – दीपनारायण सिंह 

बेटा इस दुनियाँ में कोई कोई किसी का नहीं है ।अगर तुम्हारे पास पैसा है तो बहुत सारे लोग तुम्हारे हो जाएंगे ।अगर पैसा नहीं तो अपने भी अपने नहीं, चाहे रिश्ता कोई भी हो ।बने के बहनोई सब कोई है,बिगड़े के साला कोई नही ।जगतबाबू और उनकी पत्नी निर्मला देवी अपने बारह वर्षीय पुत्र … Read more

आज तो तूने मेरी माँ बन कर दिखा दिया बिटिया – निभा राजीव “निर्वी”

“अरे आप भी ना….आप अभी तक निमंत्रण पत्र बांटने नहीं निकले…. अखबार आता नहीं है कि हाथ धोकर उसके पीछे पड़ जाते हैं…. जल्दी जाइए ना! मुझे भी परिधि को लेकर गहनों की दुकान पर जाना है। कितने सारे काम पड़े हैं अनिकेत को भी साथ ले लीजिए, थोड़ी मदद होगी!”…. गीता जी ने स्नेहपूर्ण … Read more

 मन की सच्ची खुशी – गीता वाधवानी

अतुल और उसके पिता नवीन और उसकी मां रोशनी शहर में रहते थे। अतुल के दादा दादी गांव में रहते थे। गांव में उनका बहुत बड़ा घर था और बहुत सारे खेत भी थे। अतुल के दादाजी बहुत दयालु थे। वह किसी भी मुसीबत में गांव वालों का हर संभव साथ देते थे और गरीब … Read more

 पांच अनोखी बहुएं – सरगम भट्ट

चंपा , माया,  नेहा , दुर्गा, रानी (पांच बहुएं )कहां हो सब के सब अरे बाहर तो आओ हम खुशखबरी लेकर आए हैं हमें तो 10 दिन के लिए तुम सब आजाद हो, जितना जी में आए कर लेना मनमौजी और मनमानी अब मेरे रहते तो हो नहीं पाता। रानी – मन ही मन वो … Read more

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