डांट – विनय कुमार मिश्रा
दरवाजा खोला तो पड़ोस का प्रमोद घबराया हुआ था। रात के करीब डेढ़ बजे होंगे। “क्या बात है प्रमोद?” “भैया कुछो समझे में नहीं आ रहा है, बाबुजी को सीने में बहुत दर्द है,सांस भी नहीं ले पा रहे हैं, छटपटा रहे हैं, थोड़ा चलकर देख लीजिए ना, कुछो दवाई दे देते तो” “हां हम … Read more