डांट – विनय कुमार मिश्रा

दरवाजा खोला तो पड़ोस का प्रमोद घबराया हुआ था। रात के करीब डेढ़ बजे होंगे। “क्या बात है प्रमोद?” “भैया कुछो समझे में नहीं आ रहा है, बाबुजी को सीने में बहुत दर्द है,सांस भी नहीं ले पा रहे हैं, छटपटा रहे हैं, थोड़ा चलकर देख लीजिए ना, कुछो दवाई दे देते तो” “हां हम … Read more

 तलाक – गुरविंदर टूटेजा

अप्रकाशित    अनय व रूही दोनोें बच्चें सहमें हुये एक तरफ खड़ें थे…उधर नमन व रचना दोनों एक-दूजे पर इल्ज़ाम लगा रहें थे नमन कह रहा था तुम कमाती हो इसका मतलब ये नहीं कि तुम घर पर कुछ करोगी ही नहीं…बच्चों का ध्यान रखना तुम्हारा फर्ज है…मम्मी का नहीं..!!!!  रचना बोली…सही है ना तुम काम … Read more

 साडी कैसी लग रही है? – उषा भारद्वाज

 क्या हुआ बहू ? – सावित्री  ने अपनी जगह पर बैठे- बैठे अपनी बहू रितु की तेज आवाज सुनकर पूछा ।   कुछ नहीं मां – प्रकाश उनके बेटे ने अपने रूम से जवाब दे दिया।  सावित्री चुप होकर बैठ गई । थोड़ी देर बाद अक्कू के रोने की आवाज सुनाई पड़ी ।  क्या हुआ बेटा … Read more

अहंकार – अनामिका मिश्रा

शहर में एक मंदिर था। वहां रोज शाम को भजन कीर्तन हुआ करता था। सभी आसपास की महिलाएं जमा होती थी और मंदिर में भजन-कीर्तन किया करती थी। उसी मंदिर में एक गरीब पुजारिन रहती थी,पूजा पाठ किया करती थी मंदिर के भरोसे ही उसका गुजारा चल रहा था। दिन-रात मंदिर में ही सेवा करती … Read more

और अहम पिघल गया – लतिका श्रीवास्तव 

..”मैं इस हॉस्पिटल का चीफ सर्जन भी हूं और बेस्ट सर्जन भी हूं…..मेरे कारण ही इसकी साख है लोकप्रियता है…..मेरा नाम सुनकर ही लोग यहां आते हैं…..मेरे बिना इसका कोई अस्तित्व नहीं है और आप सभी का भी …. लोग सिर्फ और सिर्फ मुझसे ही सर्जरी करवाने आते हैं….”डॉक्टर विक्रम बोलते बोलते सांस लेने के … Read more

मेरी बेटियां ही मेरा अहंकार है – गीतू महाजन

  दांत के दर्द से परेशान सुषमा जी आज भी डेंटिस्ट के पास आई हुई थीं। डॉक्टर ने उन्हें तीन से  चार सिटिंगस लेने के लिए बोला था। आज उनका तीसरा दिन था। आराम तो पहले से काफी था उन्हें पर अभी एक दिन और आना था। ड्राइवर ही उन्हें ले आता था। आज भी … Read more

 अहंकार – विनोद प्रसाद

कौशल कुमार जी भारतीय रेल सेवा में अधिकारी पद पर कार्यरत थे। उनके हर क्रिया-कलाप में अधिकारीपन की बू आती थी। अधीनस्थ कर्मचारियों के साथ उनका व्यवहार रूखा रहता था। उन्हें लगता था कि रौब और भय के द्वारा ही कर्मचारियों से काम लिया जा सकता है।  उनके इस व्यवहार से अधीनस्थ कर्मचारियों में हमेशा … Read more

कठपुतली – मंगला श्रीवास्तव

सीमा अपने फ्लेट की गैलरी में बैठी सकूँन से चाय पी रही थी। आज वह *आजाद* हो गई थी  एक कठपुतली नुमा जिंदगी से। वह शादी के बाद बहुत खुश थी वह अच्छे प्यार करने वाले सास ससुर ,सुंदर उच्चपद आसीन पति राजीव को पाकर। पर कुछ दिनों बाद ही उसकी खुशी काफूर हो गई … Read more

ढोलना” – डॉ .अनुपमा श्रीवास्तवा

 सीधे सरल और सहृदय थे हमारे गांव के शिक्षक बाबु साहब जिन्हें हर कोई मास्टर जी के नाम से संबोधित करता था। शायद ही कोई गाँव का बच्चा होगा जो उनसे अच्छी शिक्षा नहीं लिया होगा। बच्चे बुढ़े सभी उनका आदर करते थे।  मास्टर जी को गुजरे दो साल हो चुके थे। पिछले साल जैसे … Read more

उम्मीद की किरण: लेडी सिंघम किरण सेठी

लिंग-भेद हमारे समाज का एक ऐसा चलन है,जो इस 21वी सदी में भी समाप्त नहीं हो रहा, आज भी लड़कियों पर कई तरह की पाबंदियां  लगाई जाती हैं। उनको घर से शाम ढलते ही कहीं जाना हो तो बोला जाता है कि अकेले मत जाओ,पापा या भाई में से किसी को साथ लेकर जाओ। अब … Read more

error: Content is protected !!