भगवान का दूसरा रूप – डॉ. पारुल अग्रवाल
आज रागिनी के बेटी खुशी 12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद बैंगलोर हॉस्टल में रहने जा रही थी। आज पहली बार वो घर से बाहर की दुनिया में कदम रख रही थी।आजकल वैसे भी सबके एक या दो बच्चें होते हैं जिनको बहुत ही नाज़ो से पाला जाता है। रागिनी खुश थी,कि बेटी का … Read more