“भरोसे का खून” – कविता भड़ाना
लक्ष्मी सूनी -सूनी आंखों से एकटक अपने घरौंदे को बिखरते हुए देखे जा रही थी, जिस इंसान के लिए उसने अपनी सगी बहन के भरोसे को कुचल के रख दिया था, वही उसे दूध में से मक्खी की तरह निकाल फेंकेगा ये तो कभी सोचा भी नहीं था, पर जिस रिश्ते का आधार ही स्वार्थ … Read more