प्रेम से बनता परिवार – सरला मेहता
बचपन की सखियाँ मंदिर में मिल जाती हैं। वहीँ पेड़ी पर बैठ लगी सुनाने अपनी राम कहानियाँ। चर्चा का मुख्य मुद्दा परिवार व बहू बेटों पर ही केंद्रित है। पवित्रा शान से कहती है,” देख बेना, मेरी तो एक ही बहू है पर ठीकठाक है। बोलती है कामपुरता। मैं तो ठहरी बातूनी। बस यूँ समझ … Read more