बेटियां बोझ नहीं होती – गणेश पुरोहित

  उसकी स्मृति पटल पर मम्मी-पापा का एक वार्तालाप उभरा। मम्मी कह रही थी- क्यों लड़की को बाहर पढ़ने भेज रहे हो ? जानते नही, जमाना कितना खराब है। लड़किया घर में, मोहल्ले में और अपने शहर में सुरक्षित नहीं है, फिर पराये शहर में बिना मां-बाप के साये के कैसे रहेगी ? मेरा मन नहीं … Read more

छांव है कभी-कभी तो धूप जिंदगी – किरन विश्वकर्मा 

सुयश शॉप से आकर उदास से सोफे पर आकर निढाल से   होकर बैठ गए…. अंशू ने पानी दिया और रसोई में रात के खाने की तैयारी करने लगी। खाने के समय भी वह चुपचाप खाना खाते रहे…… बच्चे भी समझ गए थे कि पापा का आज मूड सही नही है….. पर अब तो धीरे- … Read more

अंधकार से प्रकाश – बालेश्वर गुप्ता

            देखो रमेश, सूर्य ढलने को है,फिर अंधेरा छा जायेगा।ये अंधेरा कितना डरावना होता है ना?सच मे मेरा वश चले तो सूर्य को कभी अस्त ना होने दूँ।     माधवी,ये तो है कि अंधेरा किसी को भी अच्छा नही लगता,सब यही चाहते है सूर्य सदैव चमकता ही रहे।पर माधवी यदि ऐसा हो भी जाये तो क्या संसार … Read more

कभी धूप कभी छाव – दीपा माथुर

ओह अर्पिता तुम भी कितनी जिद्दी हो ? एक दो दिन की ही तो बात है ये लैपटॉप रख लो जब एग्जाम हो जाए लोटा देना। नही मोहिनी मैं फोन से पढ़ लूंगी तुम टेंशन मत करो। तुम्हे मेरे पास होने की पार्टी जरूर दूंगी। लेकिन..… नही मोहिनी मुझे अकेले चलने की आदत सी है। … Read more

आखिरकार (कहानी) – डॉ उर्मिला सिन्हा

 गोपू निढाल होकर बिस्तर पर जा गिरा।बुरी तरह थक गया था। अन्दर से वार्तालाप , ठहाकों का मिला-जुला शोर मानों उसे चिढा रही थी। आधुनिक कोठी के पिछवाड़े सेवकों के लिए बने हुए छोटे-छोटे कमरे। जिसमें गोपू अपनी मां के साथ रहता है। मां के आंचल का सुख उसे यहीं मिलती है। थका-हारा जब वह … Read more

सुमि – सुधा शर्मा

‘सुमि’,इतने मधुर स्वर में कहा किसी ने कि हवाओं में रस भर गया । सुमि रसोईघर से बाहर आई।’क्या कर रहीं थीं? भूल गयीं? आज मेरी छुट्टी है हमें बाहर चलना है लंच के लिए । आज सारा दिन  हम सब साथ बितायेगे । चलो , अनु  को तैयार होने  को कह कर आया हूँ … Read more

गलतफहमी – संगीता त्रिपाठी

कैब बहुत तेजी से सड़क पर भाग रही थी, उससे ज्यादा तेज गति से अनु के मन में उथल -पुथल मची थी। बस ईश्वर कुछ मोहलत दे दो, अम्मा को यहाँ ला कर अच्छे से इलाज कराऊंगी..। टैक्सी की गति तेज थी, पर जाने क्यों अनु को वो रेंगती हुई लगी, ड्राइवर को झल्ला कर … Read more

ऐसा जीवनसाथी सबको मिले! – मीनू झा 

जिंदगी मौके कम अफसोस ज्यादा देती है ऐसे ही नहीं कहा गया है बहू….तब कितना कहा था मैंने छह महीने साल भर की तो बात है रख लो ना सुरभि को,कुछ बन जाएगी तो जीवन भर नाम लेगी…बेचारी बिन बच्ची की मां…पर नहीं पता नहीं क्या चलाती रही दिमाग में–मीना अपनी बहू सरिता से कह … Read more

मेरा इम्तिहान बाकी है  – किरण केशरे

अरे अब उठ भी जा महारानी,सूरज सिर पर चढ़ गया है और कब तक सोएगी! माँ की आवाज गूंजी थी कानों में,,,, माँ की बड़बड़ाहट चालू हो गई थी… पता नही कब आदत सुधरेगी इस लड़की की ससुराल जाएगी तब मालूम पड़ेगा! इसका दिन तो आधे दिन के बाद ही शुरू होता है!  अभी तो … Read more

जीना इसी का नाम है – कुमुद मोहन

बड़े दिनों बराबर वाला फ्लैट खाली पड़ा था। मधु और सुरेश जी अकेले रहते। बच्चे दोनों बाहर थे कभी-कभार ही आ पाते। मधु का मन था कोई ढंग उनकी हमउम्र का आ जाए तो थोड़ी कंपनी मिल जाए। फिर एक दिन जैसे भगवान ने उसकी सुन ली। सामने खड़ा ट्रक देखा जिसमें से सामान उतर … Read more

error: Content is protected !!