ज़हर बुझे – रवीन्द्र कांत त्यागी

नहीं, ये कहानी नहीं है. कहानी तो बिलकुल नहीं है. साहित्य वाहित्य का भी इस से कुछ लेना देना नहीं. इंसान के भीतर, जन्म से लेकर उम्र भर तक जो ग्रंथियां बनती बिगड़ती रहती हैं, जिनमे से कई अनसुलझी गुंन्थियाँ बन जाती हैं और उन पर जीवन भर एक बड़ा वाला अलीगढ़ का ताला पड़ा … Read more

अपने अपने पैमाने – रवीन्द्र कान्त त्यागी

बात कुछ बारह या तेरह वर्ष पुरानी है। मेरे एक रिश्तेदार ने अपनी मेधावी बेटी का रिश्ता दिल्ली में रहने वाले एक अच्छी जॉब और सम्पन्न घराने के लड़के से तय किया था। लड़का और लड़की दोनों एक दूसरे के बिलकुल अनुकूल थे और परिवार के लोग भी इस रिश्ते से बहुत खुश दिखाई दे … Read more

कर्मों का फल तो इसी धरती पर मिलता है – मंजू ओमर 

शकुन्तला जी अपने कमरे में बैठीं बैठी आंसू बहा रही थी । अपने कर्मों पर ,जो कुछ उन्होंने अपने परिवार के साथ और खास तौर से अपने पति श्रीनिवास के साथ किया था उसकी गणना कर रही थी।आज खुद जिस स्थिति में है उसका हिसाब किताब लगा रही थी। जिसकी जिम्मेदार वो खुद थी कोई … Read more

रिटायरमेंट – उमा वर्मा

रमण जी का आज रिटायर मेंट हो गया ।सवेरे सवेरे ।जी हां, उपर वाला रिटायर मेंट ।ईश्वर ने उन्हें अपने पास बुला लिया ।घर दोस्तों और परिवार से भरा हुआ है ।पत्नि शोभा बदहवास बैठी रो रही है ।आँसू थमते ही नहीं है ।दो बेटे गुड़ गांव में नौकरी करते हैं । फ्लाइट से आ … Read more

रिटायरमेंट – लक्ष्मी त्यागी

शाम का समय था ,चमनलाल जी ,के लिए फोन आया ,उन्होंने फोन उठाया ,दूसरी तरफ से उनके मित्र केशव लाल जी का फोन था, उलाहना देते हुए बोले -अरे यार! क्या कर रहे हो ?अभी तक यहाँ नहीं पहुंचे।  आ रहा हूँ ,कहते हुए उन्होंने तुरंत फोन रखा और बच्चों से बोले -जो कार्य मैंने … Read more

बहुरानी रोज रोज पैर ना छुआ करो! – मधू वशिष्ठ

कई बार तो ऐसा लगता था मानो उठते ही कोई दौरा पड़ गया या चक्कर आ गए। जी हां घर में नियम था, सवेरे शाम घर के हर बड़े के पैर छूना। नहीं-नहीं, पैर छूने में कोई परेशानी नहीं थी समस्या तब आती थी जब यह फैसला करना कठिन हो जाता था शाम के पैर … Read more

रिश्ते अहंकार से नहीं त्याग और माफी से टिकते हैं – हेमलता गुप्ता

बड़ी बहू. जा छोटी बहू को जाकर कल के लिए बोल आ, कल देवी जी पूजेंगे, तो सुबह 8:00 बजे ही आ जाएगी ताकि तुम दोनों समय से खाना और कन्या पूजन की तैयारी कर सको ! नहीं मां. आपको पता है 8 दिन से मेरी उससे बोलचाल बंद है मैं उसे बुलाने क्यों जाऊं… … Read more

मातृत्व का सफर – श्वेता अग्रवाल

शिखा डॉक्टर के चेंबर में बैठी बेसब्री से अपनी रिपोर्ट का इंतजार कर रही थी। बेचैन होकर कभी वह अपने साड़ी के पल्लू को अपनी ऊॅंगली में लपेटती और खोलती तो, कभी अपने माथे पर आए पसीने को पोंछती। कभी अचानक ही चेयर से उठकर  चेंबर में टहलने लगती तो फिर अगले ही पल जाकर … Read more

रिटायरमें – रश्मि झा मिश्रा 

“.…चलिए ना हम भी कहीं चलते हैं घूमने… शादी के दस साल हो गए… अभी तक हम कहीं भी घूमने नहीं गए…!” ” घूमने नहीं गए… उसके पीछे की वजह भी तो देखो… कितनी जिम्मेदारियां हैं हमारे सर पर… और घूमना क्या मुफ्त में होता है…!” ” अरे… मैं कहां कह रही मुफ्त में होता … Read more

आपे से बाहर होना – खुशी :

Moral Stories in Hindi अर्जुन एक बहुत इंटेलीजेंट लड़का था।उसे हर चीज का अच्छा ज्ञान था।बस उसमें एक ही कमी थी कि वो गुस्सा बहुत करता था और गुस्से में वो बेकाबू हो जाता।उसे घर में सभी यही समझाते बेटा अपने इस अवगुण को त्याग दे तो तू हीरा है हीरा।अर्जुन बीटेक कर नौकरी की … Read more

error: Content is protected !!