दाग – कल्पना मिश्रा 

“मैडम आपसे कोई मिलने आया है ,,,,”  सियाराम ने कहा तो मैं सोच में पड़ गई ..’इस वक्त,,, इस वक्त कौन आया होगा? सब जानते हैं कि मैं रात में किसी से नही मिलती तो,,,, “कुछ नाम भी तो बताया होगा सियाराम?” मैंने उससे पूछा।  “जी मैडम! कोई बुज़ुर्ग सी महिला हैं,सावित्री पाठक नाम बता … Read more

खुशियों के रंग अपनों के संग – कविता भड़ाना

पांच” देवरानी- जेठानी में सबसे छोटी “रमा” के बेटे की आज बारात निकलने वाली है, खूब चहल -पहल और रौनक लगी हुई है। बारात निकलने से पहले बहन के बच्चो की शादी में “मामा” के द्वारा “भात भरने” की रस्म की जाती है, जिसमे  भाई अपनी बहन की ससुराल अपनी सामर्थ अनुसार उपहार लेकर आता … Read more

बदलती तारीखे बदलता नजरिया !! – पायल माहेश्वरी

तारीख़ थी 13 मार्च 2017 मुम्बई में रहने वाला नवविवाहित जोड़ा कीर्ति व यश बहुत उत्साहित था, आज पहली बार यश के माता-पिता व कीर्ति के सास ससुर अपने बेटे बहू की नयी गृहस्थी को देखने आने वाले थे।  कीर्ति उनके स्वागत में कोई कमी नहीं रखना चाहती थी और उसने नौकरी पेशा होने के … Read more

चुनौती – बेला पुनिवाला

  एक औरत के लिए सब से बड़ी चुनौती का वक़्त तब आता है, जब उसे अपने पति और बच्चों में से किसी एक को चुनना होता है।              ऐसा ही कुछ हमारी कहानी की नमिता के साथ हुआ है। नमिता एक हाउस वाइफ है और उसके पति निशांत किसी बड़ी कंपनी में जॉब करते है। एक … Read more

दामाद के रूप मे मिला बेटा – संगीता अग्रवाल

घर मे हंसी खुशी का मोहोल था सुनीता जी तो बहुत ही खुश थी हो भी क्यो ना बेटी की शादी इतने अच्छे घर मे जो होने जा रही थी । हर माँ का यही तो ख्वाब होता है कि बेटी को शादी बाद ऐसा ससुराल मिले जहाँ उसे किसी चीज की कमी ना हो … Read more

 कुछ परायें अपने कुछ अपनें परायें हो जातें हैं – गुरविंदर टूटेजा 

   नीता जल्दी चलों…तैयार नहीं हुई क्या…?? तैयार हूँ राजीव…चलो ये सारा सामान भी कार में रख लों…कहतें हुयें नीता की आँखों में आँसू आ गये…पापाजी तो पहले ही चले गये थे…अब मम्मी जी के जाने से तो घर सूना ही हो गया है…मुझे कभी माँ की कमी महसूस नहीं होने दी…हम उनके बिना कैसे रहेगें … Read more

इंतजार खत्म नहीं होता – गीता वाधवानी 

गंगा दशहरा होने के कारण, रेलवे स्टेशन पर गंगा स्नान करने जाने वालों की अत्यधिक भीड़ और हलचल थी।       दिल्ली से हरिद्वार जाने वाली रेलगाड़ी में तिल धरने की भी जगह ना थी। ऐसे में जैसे तैसे जतन करके श्याम अपनी पत्नी राधा और 8 वर्षीय बेटी नीलम और 3 वर्षीय बेटे गोलू के साथ … Read more

“अकेलापन” – अनु अग्रवाल

हरि बेटा….तेरी माँ की तबियत बहुत खराब है…….थोड़ा समय निकालकर…….. “मैं कोई डॉक्टर थोड़े ही हूँ….आप दवा दे दो माँ को ठीक हो जायेंगीं”- हरि….. रमाशंकर जी की बात बीच में ही काटकर बोल पड़ा। “हर बीमारी का इलाज सिर्फ दवा नहीं होती बेटा….. अकेलापन खा चला है उसे…..कैसी तड़प रही है तुम सबसे मिलने … Read more

पराये हुए अपने – कमलेश राणा

वो शाम बहुत अजीब सी बेचैनी से भरी थी। कोई किसी से न बात कर रहा था, न ही नजरें मिला रहा था या यूँ कहें कि बात करने के लिए कुछ था ही नहीं। वैशाली की रिपोर्ट का सभी व्यग्र हो कर इंतज़ार कर रहे थे।  कुछ दिनों से वैशाली को चाहे जब चक्कर … Read more

!! भरोसा !!  – मृदुला कुश्वावाहा

“अरे! काजल बिटिया, आज कहाँ जा रही हो? अब तो नौकरी छोड़ दी हो ना?” काजल पीछे मुड़कर- “हाँ पापा, आज मैं अपने बकाये पेमेंट का हिसाब करने जा रही हूँ।” – “ठीक है बेटी जाओ, अपना हिसाब करके आओ और हाँ, ज्यादा उलझने की जरूरत नहीं है। तुम्हें मोबाइल शॉप के मालिक बेइज्जत करके … Read more

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