लड़का हो या लड़की। दर्द भी बराबर होता है – सविता गोयल 

अरे बहू, ये क्या कर रही हो। अभी तो लल्ला खाली बीस दिन का हुआ है और तुम अभी से कपड़े धोने चल पड़ी। माँ जी, पिछली बार भी तो बीस दिन होते ही मैं काम करने लगी थी। तो इस बार भी कर लूंगी। नहीं नहीं बहू, अभी तेरा शरीर कच्चा है। आस-पड़ोस में … Read more

इतना आसान नहीं है उसे भूल पाना – संगीता अग्रवाल 

” स्नेहा कहां हो तुम …स्नेहा …!” निकुंज अपनी पत्नी को आवाज लगाता हुआ घर में दाखिल हुआ। ” लो तुम यहां बैठी जाने कहां गुम हो और मैं तुम्हे घर भर में ढूंढ रहा हूं !” निकुंज पत्नी को बालकनी में गुमसुम बैठे देख बोला। ” आ गए आप … मैं चाय लाती हूं … Read more

खिलवाड़ ! – वर्षा गर्ग

“सुना काव्या?”तुमने “किस बारे में बात कर रही हैं स्पष्ट बताइए ना।” “यही राकेश जी के बारे में..!” “ओह,मुझे लगा कोई खास बात होगी।अच्छा भाभी, धरा के आने का समय हो गया, मैं चलती हूं।” काव्या तो कुछ ही पलों में आंखों से ओझल हो गई पर आंखों के सामने पूरी फिल्म गुजरने लगी। बीस … Read more

रिश्तों का जटिल ताना बाना – डॉ. पारुल अग्रवाल

आज राशि इधर से उधर सजीधजी इधर से उधर काफी भाग दौड़ कर रही थी, पूरा घर भी मेहमानों से भरा हुआ था। चारों तरफ बहुत हंसी-खुशी का माहौल था, हो भी क्यों ना आज राशि और उसके पति की कई सालों की तपस्या का परिणाम था कि वो इतनी अच्छी सोसायटी के सभी सुविधाओं … Read more

“वेदना और स्वार्थ ” – कविता भड़ाना

स्वार्थ… स्वार्थ आखिर है क्या? अपने सुख के लिए या कोई इच्छा पूरी करने के लिए किसी ऐसे इंसान के भी तलवे चाट लेना, जो हो सकता है के हमे बिलकुल पसंद ना हो….पर अपने स्वार्थ के लिए हम अपने जीवन में उसे स्थान देते ही है। कभी कभी हम बरसों तक एक ऐसे इंसान … Read more

आस्था या स्वार्थ – कमलेश राणा

दादी, दादी जल्दी आओ,,, देखो यह क्या हो रहा है टीवी में..  विभु जोर जोर से चिल्ला रहा था और काफी डरा सहमा सा था..  उसकी आवाज़ की तड़प महसूस कर मैं दौड़कर वहाँ पहुंची तो सचमुच वह नजारा भयाक्रांत कर देने वाला था। मैं भी डर गई और सांस रोक कर उस लाइव टेलीकास्ट … Read more

सच्चा प्यार, सवार्थ से परे – राशि रस्तोगी 

प्यार शब्द का अर्थ बहुत ही गहरा है,प्यार में क्या मेरा क्या तेरा, ये तो बस स्वार्थ से परे होकर दूसरे व्यक्ति के लिए कुछ कर जाने का जज़्बा है| आइये पढ़ते हैं ये कहानी.. स्नेहा की शादी वरुण से हुई.. स्नेहा दो बहने हैं.. एक छोटी बहन है ज्योति। वरुण दो भाई हैं.. उसके … Read more

“विश्वास  और वफादारी” – दीपा साहू “प्रकृति”

इंसान हैं भावनाएँ तो होती हैं।बिना भाव के इंसान ,इंसान कहां रह जाएगा? और किसी से लगाव होना स्वाभाविक प्रक्रिया ।स्वतः ही अपनापन जन्म ले ही लेता है।पर  इस अपनत्व के दायरे होने चाहिए या नहीं होने चाहिए ? कृति के शादी के बाद उसके पति कार्तिक के दोस्तों का आना-जाना लगा ही रहता ।वो … Read more

थोड़ा स्वार्थी होना भी जरुरी है – संगीता त्रिपाठी

 “माँ.. मेरा सिलेक्शन अमेरिका के एक अच्छे कॉलेज में हो गया”अंकुर चिल्लाते हुये मधुरा के गले लग बोला। बेटे का अच्छी जगह एडमिशन हो गया ये जान मधुरा भी खुश हो गई। “कितने साल की पढ़ाई है “मधुरा ने पूछा। “माँ, दो साल… फिर वहीं जॉब करना होगा “अंकुर ने कहा। “क्यों, जॉब क्यों करेगा … Read more

प्रायश्चित भरा स्वार्थ – बालेश्वर गुप्ता

   एक शोर सा उठा, कोई जोर से चिल्लाया अरे ये तो कोने वाले बंगले वाले अंकल हैं, पता नही इन्हें क्या हुआ—-?      काफी सारे लोग उस ओर दौड़ पड़े,देखा कि शंकर अंकल सड़क पर बेहोश पड़े थे।कॉलोनी में सब उन्हें अंकल ही कहते थे।एक नौकर के साथ 500 गज के बंगले में शंकर अकेले ही … Read more

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