“जैसे संस्कार-वैसा व्यवहार” – कुमुद मोहन

ब्याह के दस साल बाद भी राजन और  उमा संतान सुख से वंचित रहे! संतान प्राप्ति के लिए उन्होंने हर मंदिर में दिये जलाऐ,हर चौखट पर माथा टेका,हर मजार ,दरगाह पर चादर चढ़ाई,हर गुरूद्वारे पर अरदास लगाई! जाने कितने व्रत अनुष्ठान कराऐ! आखिरकार भगवान ने उन की सुन ली! उनके घर विनय के रूप में … Read more

संस्कारी बहू  – डा. मधु आंधीवाल

  अभी कुछ महीने पहले ही तो सामने वाले मकान में वह दुल्हन बन कर आई थी पर उसका स्वागत बहुत ही ठंडे वातावरण में हुआ । कोमल सी लता जी त तरह स्वर्णिम आभा लिये हुये भयभीत हिरनी की तरह नाम था कनक और उसके जीवन साथी का नाम था स्वप्निल । दोनों का प्रेम … Read more

हमारा धर्म और संस्कार यही कहते है। – ऋचा उनियाल बोंठीयाल

“ये क्या है? इतना बेस्वाद खाना बनाया है। थू…. छी!!! नमक इतना भर कर डाला है सब्ज़ी में।  बुड्ढी होने को आई हो और अभी तक खाना बनाने का सलीका नहीं सीखी हो । “ गुस्से से रमेश ने खाने की थाली ज़मीन पर पटक दी, और लड़खड़ाता हुआ खटिया पर बेसुध सा लुढ़क गया। … Read more

” मर्यादा ” – सीमा वर्मा

 हिमांशी अकेली सैर कर रही हो साहिल नहीं आता है तुम्हारे साथ ? ‘ नहीं ‘ हिमांशी कुछ समझ नहीं पा रही है, उसके दिल में हजारों सवाल है। वह जितना ही इन सवालों के घेरे से निकलने की कोशिश करती है उतनी ही उलझती जाती है। साहिल और उसके बीच का रिश्ता पति-पत्नी के … Read more

बहू की रोटी ! – रमेश चंद्र शर्मा

संध्या की निमिष से  शादी हुए पांछ महीने बीत गए। घर में बुज़ुर्ग सास निशा और ससुर उमेश। खाना बनाने में संध्या की बिल्कुल रुचि नहीं । नया सीखने की कभी कोशिश नहीं की । आराम तलब। निशा (पति उमेश से) ” आजकल पेट में बहुत गड़बड़ रहने लगी है । संध्या की खाने बनाने … Read more

“चटपटी यादें बचपन की” – कविता भड़ाना

नमस्कार 🙏 आज बालदिवस पर मुझे अपने बचपन की एक मजेदार घटना याद आ गई तो सोचा क्यों ना आप सब के साथ सांझा की जाए, तो ये घटना तब की है जब में आठवीं कक्षा में थी। अपनी कक्षा के सबसे बड़े शरारती बच्चो में से एक थी, लड़ाई झगड़े और टीचरों से शिकायते … Read more

 क्या यही प्यार है – कमलेश राणा

हर स्त्री के लिए उसका प्रियतम इस दुनियां का सबसे खूबसूरत, ज़हीन, समझदार और प्यारा इंसान होता है लेकिन प्यार अपने साथ बेवफाई का डर भी हरदम समेटे रहता है। इस बात का अहसास मुझे किरण से मिलने के बाद बड़ी शिद्दत के साथ हुआ।  उससे मुलाकात का किस्सा भी बड़ा मजेदार है।हमारे पड़ोस में … Read more

मर्यादा या जीवन क्या है जरुरी? – सुमन श्रीवास्तव

आज पूरे दौरौली गाँव में सन्नाटा पसरा हुवा है और सन्नाटा भी इतना गहरा कि गायो के रम्हाने और कुत्तो के भौकने की आवाज गाँव के एक छोर् से दूसरी तरफ साफ सुनाई दे रही है|          कल तक जो गाँव वाले वीरेन्द्र जी के पीठ पीछे हँसते थे आज उनके जाने … Read more

लकीर के फ़कीर – कल्पना मिश्रा

जिसका डर था,वही हुआ। दादी सास को आये पाँच दिन ही हुए थे और उसके पीरियड हो गया। “अब क्या होगा?” उसे उलझन सी होने लगी। दादी पुराने विचारों की, बेहद छूत विचार मानने वाली महिला थीं। किसी को छूना नही… फ्रिज ,किचन का कोई सामान नही छूना, तीसरे दिन सिर धोकर शुद्ध होना,,,,”हे भगवान!! … Read more

अन्नपूर्णा – अनामिका प्रवीन शर्मा

” मैं अब इस घर में एक पल के लिए भी नहीं रह सकती जा रही हूं मैं ” कहते हुए शिवन्या घर से निकल गई । पीछे से समीर भी उतनी ही तेज आवाज में चिल्लाया  ” हाँ हाँ  जाओ , रोका किसने है । देखता हूं कहाँ जाओगी ,  तुम्हें क्या लगता है … Read more

error: Content is protected !!